सावधानी / बाहर से आए परिवार के लोगों की घर में इंट्री बंद, भेज रहीं क्वारेंटाइन

Entry of family members from outside came into the house, sending quarantine
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Entry of family members from outside came into the house, sending quarantine

  • परिवार की सुरक्षा के लिए महिलाएं निभा रहीं हैं जिम्मेदारी

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:00 AM IST

बिक्रमगंज. कोरोना संक्रमण परिवार का सदस्यों के बीच एक दीवार खड़ा कर दिया है, लेकिन यह दीवार मनभेद व मतभेद का नहीं है, बल्कि खुद को और समाज को सुरक्षित रखने के लिए घर के महिलाएं ही खड़ी की है। कोरोना संकट की इस घड़ी में बाहरी राज्यों से पलायन कर अपने घर आने वाले परिवार के सदस्यों को यदि सरकार व प्रशासन द्वारा क्वारेंटाइन सेंटर पर जगह नहीं मिल रहा है तो वह अपने घर जाते हैं। लेकिन घर की जागरुक महिलाएं उन सदस्यों को घर के अंदर इंट्री करने से रोक लगा दे रही हैं और गांव के बाहर किसी सरकारी भवन नहीं तो फिर घर से दूर किसी निजी ही भवन में रहने की नसीहत दे रही है।

जो कोरोना व इंसान के बीच चल रहे युद्ध मे हथियार के काम कर रहा है। हालांकि ऐसे बहुत ही कम है,लेकिन इस तरह की महिलाओं की जागरुकता ही कोरोना से जीत दिलाने में मददगार साबित होगा। बिक्रमगंज प्रखंड के कुसुमहरा पंचायत में भी एक मामला देखने को मिला था जहा एक युवक विदेश से आया था। जिसके घर के परिजनों खासकर महिला सदस्यों ने घर से दूर एक भवन में अकेले उन्हें रहने का व्यवस्था किया था। बाद में प्रशासन ने उसकी सैंपल जांच कराया था।

इसी तरह हाल के दिनों में जिस तरह से प्रवासी मजदूरों का आने का सिलसिला शुरु हुआ तो क्वारेंटाइन सेंटर भी छोटे पड़ रहा है। ऐसे में दिल्ली गाजियाबाद से आई गर्भवती महिला को ग्रामीणों ने गांव से बाहर एक नव निर्मित भवन में रहने को कहा था बाद में जब एसडीएम को जानकारी हुई तो मानी गांव के पंचायत भवन को क्वारेंटाइन सेंटर में तब्दील कर युक्त महिला को वही रखा गया। इसी तरह संझौली प्रखंड और ग्रामीण इलाकों इलाकों में बना क्वारेंटाइन सेंटर में अन्य प्रवासियों को रहने को जगह नहीं है तो वह सीधे अपने घर चले जा रहे हैं।

जहां परिजन उन्हें परिवार व समाज से दूर रखने व वही खाने पीने की व्यवस्था कर रहे हैं ताकि परिवार के सदस्य और आस-पास के लोग सुरक्षित रह सके। नाम नहीं छापने की शर्त पर परिवार के सदस्यों ने बताया कि सरकारी स्तर के व्यवस्था फेल है। बीडीओ व मुखिया अपने चहेतों को गांव के क्वारेंटाइन सेंटर पर रखवा रहे हैं। जगह के अभाव होने के बाद कुछ प्रवासी सीधे घर चले जा रहे हैं जिन्हें घर की महिलाएं अलग व्यवस्था कर रही हैं। उनका खाना दूर से दिया जा रहा है। हालांकि इस संबंध में अधिकारियों से बात किए जाने पर कुछ भी साफ साफ बता नही रहे हैं और बोलने से परहेज कर रहे हैं।

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