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परेशानी:घाटे का सौदा साबित हो रही है टमाटर की खेती, औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर हैं किसान

बिक्रमगंजएक महीने पहले
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खेतों से टमाटर तोड़ते किसान। - Dainik Bhaskar
खेतों से टमाटर तोड़ते किसान।
  • इस बार सीजन में टमाटर उत्पादकों को नहीं मिल रही उचित कीमत, चार रुपए किलो बेचने को मजबूर

टमाटर की खेती इस बार किसानों को घाटे का सौदा साबित हो रही है । क्योंकि टमाटर का उचित बाजार दाम उपलब्ध नहीं मिलने से किसानों को भारी घाटे उठाने पड़ रहे हैं। रही सही कोर कसर टमाटर किसानों को कोरोना संक्रमण में तोड़ कर रख दिया है। जिस कारण टमाटर किसानों को अब उनके क्षेत्र से रामा तलाई का मजदूरी भी मिलना बमुश्किल होने लगा है। ऐसे में किसानों को इस बात की चिंता सताने लगी है कि खेतों को खाली करने के लिए अपने उपजाऊ टमाटर को क्या करें। कैसे खेतों को खाली करें। मालूम हो कि राजपुर प्रखंड का पश्चिमी तथा कुछ पूर्वी इलाकों में टमाटर की खेती पिछले एक दशक से देश के बड़े बाजारों में अपनी मिठास और खूबसूरती की एक अलग छाप छोड़ती रही है। लेकिन बीते साल से वैश्विक महामारी काेराेना के कारण किसानों को बाहर के बाजारों पर टमाटर नहीं पहुंच पाने के कारण उसका उचित दाम नहीं मिल पा रहा है। जिस कारण किसान काफी चिंतित व परेशान है।
चार रुपए केजी बिक रहा टमाटर: मालूम हो कि इलाके में कई कैसे किसान है जो मांगे पट्टे पर किसानों से खेत ले टमाटर की खेती करते हैं लेकिन लोकल मार्केट में भी टमाटर के दाम ₹20 प्रति 5 किलो बिक्री होने से किसानों को काफी घाटा मोहन करना पड़ रहा है टमाटर किसी का रिप्लाई भी निकालना मुश्किल हो रहा है। टमाटर की स्टोरेज भंडारण की भी व्यवस्था नहीं होने से किसानों को घाटा उठाने पड़ रहे हैं।
टमाटर के नहीं मिल रहे खरीदार:
किसान खखनु साह,लालमोहर महतो, विनोद महतो,मनोज महतो,पडरिया के रिंकू चौधरी समेत अन्य किसानों ने बताया कि एक बीघा टमाटर की खेती में लागत खर्च लगभग तीस हजार रूपया से ज्यादा का आया हैं। खेत से एक रूपया किलो की दर से भी कोई टमाटर को खरीदने वाला नहीं मिल पा रहा है। मुश्किल से एक-दो व्यापारी मिलते हैं। वो भी काफी मान-मनौउल करने पर औने-पौने दाम पर खेतों से उधारी में टमाटर ले जाने को तैयार हो रहे हैं।
मामले में प्रखण्ड कृषि पदाधिकारी अमीर चन्द राम ने बताया कि क्षेत्र में टमाटर की फसल को भण्डारण करने की अभी कोई व्यवस्था नहीं है। जिला में मीटिंग के दौरान कोल्ड स्टोरेज बनाने की मांग किसानों द्वारा उठाई जाती है। घाटे की भरपाई हेतु राहत प्रदान करने के लिए मांग किया जाएगा।

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