लापरवाही / न मजिस्ट्रेट मिले, पुलिस बल भी नदारद, चौकीदार के भरोसे चल रहा है करूप बालू घाट का चेकपोस्ट

Neither the magistrate should be met, the police force is also missing, the check post of Karup Balu Ghat is going on with the watchman
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Neither the magistrate should be met, the police force is also missing, the check post of Karup Balu Ghat is going on with the watchman

  • बालू घाटों पर अवैध खनन को लेकर समय-समय पर छापेमारी की जाती है, फिर भी धंधा है जारी

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

बिक्रमगंज. सम्पूर्ण लॉकडाउन के समय बालू घाट को प्रशासन के द्वारा संपूर्ण रूप से बंद करा दिया गया था। प्रशासन के निर्देश पर बालू घाट को खोलने की अनुमति के बाद संपूर्ण रूप से अभी कंपनी बालू खनन करने एवं बालू बेचने में कितनी कामयाब है। यह तो कंपनी ही जानती है, लेकिन अभी भी अवैध खनन करने वाले लोगों की संख्या कम नहीं है प्रशासन के द्वारा बालू घाटों पर निरीक्षण एवं छापेमारी भी समय-समय पर किए जाते हैं एवं अवैध बालू रोकने के उद्देश्य से प्रशासन के द्वारा चेक पोस्ट भी लगाए गए हैं।

लेकिन चेक पोस्ट पर नियुक्त किए गए मजिस्ट्रेट की बजाए सिर्फ चौकीदार ही नजर आ रहे हैं। चेक पोस्ट पर न पुलिस बल है नाही अधिकारी सिर्फ और सिर्फ चौकीदार ही नजर आते हैं। आखिर जिस उद्देश्य से चेक पोस्ट कर प्रशासन के द्वारा निर्माण कराया गया है। क्या उस उद्देश्य में प्रशासन के लोग कामयाब हो रहे हैं। वैसे कंपनी के द्वारा बालू का खनन किया जाए या न किया जाए राजस्व तो पूरे वर्ष का ही जमा किया जाता है। कोरोना महामारी को देखते हुए प्रशासन द्वारा लगाए गए लॉक डाउन के बाद  जैसे ही कंपनी को घाट चालू करने के लिए अनुमति दी गई तो सरकारी घाट के अलावे भी कई घाट स्वतः चालू हो गए।

घाटों से अवैध बालू लेकर या ओवरलोड लेकर ट्रक खुलेआम दिन हो या रात मुख्य मार्ग पर सरपट दौड़ रही है, लेकिन बिक्रमगंज अनुमंडल केेे काराकाट थाना क्षेत्र में करूप के पास मुख्‍य मार्ग बनाया गया चेक पोस्ट उद्देश्य सेेे भटक गया। क्योंकि वहां मजिस्ट्रेट साहब ही नहीं दिखाई पड़ते अब उनकी ड्यूटी चेक पोस्ट के अलावा कोरोना सेंटर पर लगी है या नहीं यह प्रशासनिक अधिकारियों के पास लिस्ट है।
सरपट दौड़ रहे हैं ट्रक एवं ट्रैक्टर: ओवरलोड लेकर ट्रक एवं ट्रैक्टर सरपट दौड़ रही है। लेकिन मुख्य सड़क पर बनाए गए चेक पोस्ट पर किसी प्रकार का जांच नहीं हो रहा है। जिसकी वजह से इन लोगों का मनोबल सातवें आसमान पर हैं, ट्रैक्टर वाले एक चालान पर दो या तीन खेत लगाने के चक्कर में सड़कों पर तेजी से पार होना उनकी नियति बन गई है। जिससे प्रत्येक रोज लाखों रुपए सरकार के साथ-साथ बालू कंपनी के भी चूना लग रहे हैं।

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