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बड़ी समस्या:पीएचसी में सर्पदंश की दवा नहीं, झाड़फूंक के चक्कर में जा रही जान

बिक्रमगंजएक महीने पहले
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बिक्रमगंज अनुमंडल क्षेत्र के अधिकतर स्वास्थ्य केंद्रों में सर्पदंश की दवा उपलब्ध नहीं है नतीजा सर्पदंश के मरीज को परिजन इलाज से ज्यादा समय झाड़फूंक में बिता देते है जब उनकी हालत गंभीर होता है तो परिजन उन्हें दूर के अस्पतालों या फिर निजी अस्पतालों में पहुंचते है तब तक बहुत देर हो जाता है। अनुमंडल अस्पताल धनगाई में सांप काटने के दवा एवीएस उपलब्ध भी है तो लोगों को पहुंचते पहुंचते देर हो जाता है। जिससे पीड़ित रास्ते मे ही दम तोड़ देते हैं। बिक्रमगंज अनुमंडल क्षेत्र में कई ऐसे केस सामने आ चुके हैं।

जिनका सर्पदंश के बाद समुचित इलाज नहीं होने व झाड़फूंक के चक्कर में मौत हो चुका है, लेकिन आश्चर्य जनक पहलू यह भी है कि इन सारे घटनाओं के बाद भी लोग सर्पदंश के बाद अस्पताल जाने की बजाय पहले ओझा गुनियों के चक्कर मे पड़ते हैं और असमय मौत के काल मे समा जाते हैं। बिक्रमगंज अनुमंडल क्षेत्र के अधिकतर प्रखंडों के पीएचसी में सर्पदंश की दवा उपलब्ध नहीं है।

बारिश शुरू होते बढ़ जाता है सर्पदंश की घटना
बिक्रमगंज अनुमंडल क्षेत्र के संझौली, राजपुर, दिनारा, कराकाट, नासरीगंज, दावथ, सूर्यपुरा प्रखंडों में बरसात के दिनों में जैसे ही बारिश शुरू होती है तो सर्पदंश की घटनाएं भी बढ़ जाता है। इसका आलम यह है कि बिक्रमगंज अनुमंडल क्षेत्र के खासकर संझौली, राजपुर, दावथ प्रखंड के दर्जनों ऐसे गांव है जो बारिश के बाद टापू के तरह हो जाता है जहां के ढील से सर्प निकल गांवों में प्रवेश कर जाते है। इससे इन दिनों में सर्पदंश की घटनाओं में काफी वृद्धि हो जाती है।

एक महीने पूर्व संझाैली में दाे लाेगाें की सर्पदंश से हाे गई थी मौत 
बिक्रमगंज थाना क्षेत्र के मठिया गांव में अभी महज कुछ दिनों पहले अरुण सिंह नामक व्यक्ति को सर्पदंश से मौत हो गई। उसमें भी वही हुआ। परिजन पहले झाड़फूंक कराए हालत जब गंभीर हुआ तो अस्पताल ले गए। जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। इसी तरह अभी एक महीने पहले संझौली थाना क्षेत्र के एक ही घर के दो व्यक्ति की सर्पदंश से मौत हो गई थी। कई गांवों में धारणा बना हुआ है कि नाग बाबा के पूजा अर्चना करने से सर्पदंश से लोग बच जाते हैं। बरसात शुरु हो चुका है।

बारिश भी पिछले साल से पहले से हो रहा है। ऐसे में सजगता जरुरी है। तभी सर्पदंश से बचा जा सकता है। अंधविश्वास से बचने के लिए लोगों को जागरुक करने की जरुरत है कि सर्पदंश के बाद सबसे पहले पीड़ित को अस्पताल लेकर पहुंचे अन्यथा झाड़फूंक करने के चक्कर मे बहुत देर हो सकती है। अंधविश्वास में पड़ने से बचें। ऐसा नही है कि सर्पदंश से सिर्फ अनपढ़ लोग ही झाड़फूंक के चक्कर मे पड़ते हैं बल्कि पढ़े लिखे लोग भी इस चक्कर में फंस जाते हैं।

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