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योजनाएं बनाई:जलवायु अनुकूल खेती कार्यक्रम के तहत पांच गांवों में 550 एकड़ में लगेगा धान

बिक्रमगंज सदर18 दिन पहले
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  • कृषि विज्ञान केंद्र की पहल: 40 एकड़ में खरीफ अरहर की फसल भी लगाई जाएगी, क्रॉप रेसिड्यू मैनेजमेंट के अंतर्गत पराली प्रबंधन एवं विक्रय पर भी ध्यान देना है, किसानों को सिखानी है तकनीक

रोहतास जिले में जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम के तहत 5 गांव को चयनित कर कृषि विज्ञान केंद्र के द्वारा खेती कराने की योजनाएं बनाई गई है। जिसमें 550 एकड़ भूमि पर विभिन्न आधुनिक तकनीक से खेती किए जाने की बात कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉक्टर रतन कुमार ने बताते हुए कहा कि 5 गांव में पिछले साल रबी से ही जलवायु अनुकूल खेती की जा रहे हैं। अभी वर्तमान में इनमें मूंग और उड़द लगा हुआ है। खरीफ के मौसम

को ध्यान में रखते हुए स्थान के विभिन्न तकनीकी के ऊपर खेती की जाएगी। इसके लिए सर्वप्रथम किसानों को धान की सीधी बुआई धान की सुखी गीली बुआई एवं जीरो टिलेज तकनीक से अरहर की बुआई की जानी है। उन्होंने बताया कि लगभग 550 एकड़ में किए जाने की तैयारी चल रही है। जिससे किसानों को फायदा हो सके।

300 एकड़ में धान की गीली-सूखी विधि से बुआई की जानी है
शुरहुरिया, परसा, जमोरी, बभनी, डेढ़गांव में पिछले साल रबी सीजन से ही जलवायु अनुकूल खेती की जा रही है। गांव में टिलेज तकनीकी से अरहर की बुआई का लक्ष्य लगभग सारे 550 एकड़ में की जानी है। इसके लिए 70 एकड़ में धान की सीधी बुआई, 300 एकड़ में धान की गीली सूखी विधि से बुआई 100 एकड़ में जो लोलैंड हो उनमें गीली बुआई तथा वहां पर हमेशा जलजमाव रहे एवं ऊपरी सतह पर अरहर की बुआई की जानी है साथ ही साथ क्रॉप रेसिड्यू मैनेजमेंट के अंतर्गत पराली प्रबंधन एवं उसके विक्रय पर भी ध्यान देना है।

धान का बिचड़ा डालने का समय
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ रतन कुमार ने बताया कि किसानों को लंबी अवधि वाले धान की बुआई के लिए बिचड़े को गिरा देना चाहिए। जिससे कि समय से धान तैयार हो जाए और रबी समय पर शुरू हो सके। किसानों को खास करके नाटीमंसूरी, स्वर्णा सब 1, सबर संपन्न इत्यादि प्रभेद समय से लगा देनी चाहिए। धान की विभिन्न प्रजातियां स्वर्णा सब1, सबौर श्री ,राजेंद्र श्वेता एवं कृषि विज्ञान केंद्र के धंगाई फार्म प्रक्षेत्र पर उपलब्ध है। जिसकी कीमत मोटीदाना स्वर्णा सब1 और सबौर श्री 36 रुपए प्रति किलोग्राम तथा पतला धान राजेंद्र श्वेता 42 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध है ।

जिले में 1.95 हेक्टेयर भूमि पर खेती करने का तय है लक्ष्य
जिले में धान की रोपनी 1 लाख 95 हजार हेक्टेयर भूमि पर खेती करने का लक्ष्य जिला प्रशासन के द्वारा किया गया है। जिसमें धान का बिचड़ा 19 हजार 5 सौ एकड़ में डाले जाएंगे। जिला के विभिन्न प्रखंडों में खरीफ फसल में उर्वरक प्रयोग की दृष्टि से खपत का लक्ष्य रखा गया है। जिसके तहत यूरिया( नाइट्रोजन)- 45000, डीएपी- 11 000, एपीके -71 00 ,एम ओ पी- 3200 ,एमएसपी 4500 लाख मीट्रिक टन खरीफ/ रबी/ गरमा के लिए लक्ष्य रखा गया है।

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