रमजान / अल्लाह को राजी करने के लिए इबादत में जुटे रोजेदार

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दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

बिक्रमगंज. रमजान उल मुबारक का पाक महीना हमसे जुदा होने वाला है।ईद आने में एक-दो दिन बाकी रह गया है। रोजेदार अल्लाह को राजी करने के लिए इबादत में जुट गए हैं।इसी के तहत शुक्रवार को 29 वीं शब-ए-कद्र मनाई गई। रात भर जागकर लोग अपने घरों में इबादत की।नफिल नमाजें अदा की गयी। अल्लाह से अपने गुनाहों की माफ़ी मांगी गयी।

ज्यादातर लोगों ने 29 वीं शब-ए-कद्र की रात कुरान-ए-पाक की तिलावत की। मुसलमानों में 29 वीं शब-ए-कद्र की रात की काफी अहमियत है। लोगों का कहना है कि इसी रात अल्लाह ने कुरान-ए-पाक नाजिल किया था।  इसलिए इस रात ज्यादा से ज्यादा लोग रात में जागते हैं।अल्लाह को राजी करने के लिए रात भर इबादत करते हैं।कुरान-ए-पाक की तिलावत करते हैं।
कुरआन भी हुआ था मुकम्मल: मौलाना व कारी अजीमुद्दीन ने बताया कि आखिरी अशरा ढलान पर है। तीसरे अशरे की 29 वीं शब को शब-ए-कद्र के रूप में मनाया जाता है। ।रमजान की तीसरे अशरे की पांच पाक रातों में शब-ए-कद्र की तलाश किया जाता है। ये रात हैं 21वीं,23 वीं,25 वीं,27 वीं और 29 वीं हैं। 29 वीं शब इबादत की रात होती है। 29 वीं शब को मुसलमान अजीजों की कब्रों पर सुबह फातेहा पढ़ते हैं।
हजार महीनों से बेहतर है ये रात : नगर सभापति रबनवाज खान ,मो.अय्यूब खान ने बताया कि रमजान उल मुबारक की शब-ए-कद्र हजार महीनों से बेहतर है। लॉकडाउन के चलते रात भर घरों में ही इबादत की गई। रमजान उल मुबारक की यूं तो सभी रातें बेहतर हैं,मगर शब-ए-कद्र की रात इन सब रातों से बेहतर है।रात भर इबादत की जाती है और अल्लाह को राजी किया जाता है।

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