स्वरोजगार / कृषि विज्ञान केंद्र की पहल से मत्स्यपालन में आत्मनिर्भर बन रहे रोहतास के किसान

Rohtas farmers are becoming self-sufficient in fisheries due to the initiative of Krishi Vigyan Kendra
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Rohtas farmers are becoming self-sufficient in fisheries due to the initiative of Krishi Vigyan Kendra

  • किसानों को बायो फ्लैक विधि से मत्स्य पालन करने के लिए दिया गया है अनुदान
  • इस विधि के तहत 10 फीट लंबे, 10 फीट चौड़े व 6 फीट गहरे टैंक में मछली पालन

दैनिक भास्कर

Jun 30, 2020, 04:00 AM IST

बिक्रमगंज. मछली उत्पादन के क्षेत्र में रोहतास जिले के किसान अब आत्मनिर्भर बन रहे हैं। इसमें कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक आर के जलज मददगार साबित हो रहे हैं। हाल के दिनों में जिले के सात किसानों को बायो फ्लैक विधि से मत्स्य पालन करने के लिए अनुदान देने संबधित अनुमति दिया है।
 बड़ी खबर है की मत्स्य पालन करने वाले किसानों को मछली उत्पादन करने के लिए आहर व तालाब की जरुरत नहीं है, बल्कि घर के परिसर में ही बायोफ्लॉक विधि से मछली तैयार की जाएगी। इस प्रक्रिया से पानी की भी बहुत ही कम जरुरत होगी। इस विधि के तहत दस फिट लंबे दस फिट चौड़े व 6 फिट गहरे टैंक में मछली का उत्पादन किया जाएगा।

कम क्षेत्र में स्थायी व अस्थायी रुप से किसान मछली का उत्पादन कर अपनी आय को बढ़ा सकेंगे। किसानों को इस विधि से मछली उत्पादन करने व किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से मत्स्य विभाग इस योजना पर 45 प्रतिशत तक अनुदान देने का नियम बनाया गया है। योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए अधिकारी रुप रेखा का खाका तैयार कर किसानों को लाभ देना शुरु कर दिया है।

बायोफ्लॉक विधि से उत्पादन कर ऊंची कीमत पर मछली बेच सकेंगे किसान
कृषि विज्ञान केंद्र के मत्स्य वैज्ञानिक आर के जलज ने बताया कि मत्स्य पालक बायो फ्लॉक से जैविक मछली उत्पादन कर ऊंची कीमत में बेच सकेंगे। इस संबंध में कृषि मंत्री सह जिला के प्रभारी मंत्री प्रेम कुमार से पूछे जाने पर कहा कि विभाग को रुप रेखा तैयार करने व किसानों को 90 प्रतिशत अनुदान की राशि निर्धारित करने की दिशा में पहल करने का कार्य शुरु कर देने का निर्देश विभाग को दिया गया था। जिसका लाभ किसानों को मिलना शुरु हो गया है।

हालांकि सामान्य जाती के लोगों को 45 प्रतिशत ही अनुदान मिल रहा है। इस संबंध में कृषि विज्ञान केंद्र के मत्स्य वैज्ञानिक आर के जलज ने कहा कि मत्स्य पालन में किसानों का रुझान को देखते हुए केंद्र ने 2021 से किसानों को मत्स्य बीज उपलब्ध कराएगा। तालाब का निर्माण करा लिया गया है।

बेरोजगार युवाओं में मत्स्यपालन की तरफ बढ़ा है रूझान
विदित हो कि हाल के दिनों में रोहतास जिला के बेरोजगार युवाओं में मत्स्य पालन के तरफ रुझान बढ़ा है। सरकार की भी प्लान है कि किसानों को 2022 तक आय को दुगना करना है। इस लिहाज से प्रोत्साहित के तौर पर इस विधि से मत्स्य पालन करने वाले किसानों को 45 प्रतिशत तक अनुदान राशि उपलब्ध कराने का मन बनाया है। बायो फ्लॉक विधि में मछली पालन में जैविक विधि को अपनाया जाता है। मछली मल जमा होने से पानी गंदा हो जाता है। जो मछलियों को नुकसान करता है। इससे मछली मरने लगती है।

बायो फ्लॉक विधि जार में बैक्टीरिया पैदा किया जाता है। यह बैक्टीरिया मछली के 22 प्रतिशत मल को प्रोटीन में बदल देती है। मछली इस प्रोटीन को खाती है। बचा मल जार में नीचे जमा हो जाता है। इसे बाहर निकाल दिया जाता है। इससे मछली को कोई नुकसान नहीं होता है। बायो फ्लॉक विधि से मछली उत्पादन के लिए पानी को साफ करने के लिए किसी प्रकार का पानी में केमिकल डालने की जरुरत नहीं होती है। इसमें उत्पादन होने वाला मछली को जैविक मछली कह सकते हैं। इसकी कीमत भी बाजारों में बिकने वाला मछली से ज्यादा कीमत मिलेगा।

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