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पहल:जर्रा-जर्रा टूट कर बिखर रहा रोहतासगढ़

बिक्रमगंज2 महीने पहले
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  • इतिहास पर जम गई काई, खंड-खंड हो रही धरोहर

रोहतास|कैमूर पहाड़ी पर स्थित ऐतिहासिक रोहतासगढ़ रखरखाव के अभाव में खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। इसकी सीढ़ियां, इसकी छत, इसके छज्जे, इसकी चहारदीवारी रखरखाव एवं मरम्मत के अभाव में टूट-टूट कर गिर रही हैं और यह खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। किला परिसर के अंदर छत के ऊपर एवं दीवारों पर बड़ी-बड़ी घासें उग आई हैं जिससे किले का स्वरूप धूमिल होता रहा है। इसकी निगरानी के लिए स्थानीय लोगों को रखा गया है जो कि किले की सुरक्षा में तत्पर रहते हैं। परंतु साफ-सफाई और रखरखाव की दृष्टि से किला को यूं ही लावारिस छोड़ दिया गया है।

मिट चुकी हैं तहरीरें, पर्यटकों को मिलती है अधूरी जानकारी
ऐतिहासिक धरोहर रोहतासगढ़ किला कैमूर पहाड़ी पर स्थित पर्यटन दृष्टि से एक महत्व रखता है। परिसर में अवस्थित इसके मुख्य गेट के पास किले से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए संबंधित बोर्ड भी लगाया गया है। बीते कई वर्षों पूर्व से ही उस पर लिखे अक्षर मिट गए हैं। किले के इतिहास के बारे में अधूरी जानकारियां पर्यटकों को मिल पाती हैं। वहीं नए बोर्ड लगवाने हेतु स्थानीय समाजसेवी एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा विभाग से मांग की गई परंतु नया बोर्ड नहीं लगाया जा सका, जिससे किले के इतिहास के बारे में पर्यटक जान सकें। रोहतासगढ़ की ऐतिहासिक धरोहर पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधीन संरक्षित है परंतु इसकी दशा बदहाल है। इस विभाग की कोशिशें अपर्याप्त हैं।

जिसके नाम पर जिले का नाम आज उसी की धरोहर को नष्ट होने के लिए छोड़ दिया
5000 वर्ष से भी पुराना इस किले का इतिहास है। शोधकर्ता डॉ. श्यामसुंदर तिवारी बताते हैं कि कई साम्राज्यों का उदय और अस्त इसने देखा है। तमाम इतिहास को समेटे इस धरोहर को मिटने से बचाने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा। कह सकते हैं कि इसे नष्ट होने के लिए छोड़ दिया गया है। रोहतास के पर्यटन के विकास की दृष्टि से संरक्षण जरूरी है।

राजा हरिश्चंद्र के बेटे रोहिताश्व ने बनवाया था यह किला, मुगलों व अंग्रेजों के कब्जे में भी रहा
शोधकर्ता डॉ. श्यामसुंदर तिवारी के अनुसार रोहतास गढ़ को सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र के बेटे रोहिताश्व ने बनवाया था। कालांतर में किला खरवार राजाओं, मुगल राजाओं सहित अन्य राजाओं के अधीन रहा तथा अंग्रेजों ने भी इस किले को अपने शासनकाल में इस्तेमाल किया। अभी कुछ दशक पहले तक ही यहां कि स्थिति यह थी कि नक्सलियों के भय से इस किले में कोई जाता नहीं था, पर अब हालात बदले हैं। बदले हालात में किले के जीर्णोद्धार की जरूरत है।

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