त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारी:हाईटेक तरीके से प्रत्याशी कर रहे चुनाव-प्रचार; स्वराज एप व मनरेगा साइट का कर रहे इस्तेमाल

बखरी2 महीने पहले
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बखरी प्रखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारी परवान पर है। सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रत्याशियों को सिंबल उपलब्ध करा दिया गया है। सभी प्रत्याशी अपने पक्ष में मतदाताओं को गोलबंद करने के लिए एड़ी चोटी एक करने के प्रयास में जी जान से जुट चुके हैं।

इधर इन प्रत्याशियों की मंशा पर हिन्दु आस्था का महापर्व दुर्गा पूजा ने चंद दिनों के लिए अवरोध उत्पन्न कर दिया है। प्रखंड में आगामी 24 अक्टूबर को चुनाव की तिथि निर्धारित है। ऐसे में अब यहां चुनाव प्रचार प्रसार के लिए महज दस दिन शेष बचे हैं। जबकि पर्व को लेकर मतदाता प्रत्याशियों की कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हो रहे हैं। वहीं अबकी बार अनोखा चुनाव प्रचार देखने को मिल रहा है। प्रत्याशियों ने डिजिटल तरीका अपनाते हुए पंचायती राज मंत्रालय के वेबसाइट पर उपलब्ध ई-ग्राम स्वराज एप व मनरेगा साइट को हथकंडा बना चुनाव प्रचार में उतर गए हैं।

इस एप के जरिए चुनाव मैदान में खड़े निवर्तमान प्रत्याशी अपने तरीके से मतदाताओं को लुभाने में जुटे हैं।उ नके द्वारा एप के माध्यम से पंचायतों में किए गए विकास का दावा ठोका जा रहा है। निवर्तमान प्रत्याशी एप को दिखाकर मतदाताओं को यह कहते हुए लुभा रहे हैं कि सारा डाटा एप पर उपलब्ध है। जिसे मतदाता देख सकते हैं कि हमारे कार्यकाल में इतनी योजनाओं का चयन पंचायत में विकास के लिए किया गया है। जिसके एवज में कार्यों में इतना रुपए खर्च किया जा चुका है।

मतदाताओं को दिग्भ्रमित करने में जुटे हैं विपक्षी प्रत्याशी
विपक्षी प्रत्याशी भी कम नही हैं। वे लोग इस एप का इस्तेमाल कर निवर्तमान प्रत्याशी के विरूद्ध मतदाताओं को दिग्भ्रमित करने में जुट गए हैं। विपक्षी प्रत्याशी एप को दिखाकर यह कहते हैं कि निवर्तमान ने योजना पर अंकित राशि के अनुसार काम में खर्च नहीं किया है अथवा काम ही नहीं किया है। एप पर प्रस्तावित योजना के साथ अनुमानित राशि बेवसाइट पर अपलोड की गई है। जिसे पक्ष और विपक्ष अपने-अपने तरीके से तर्क देकर मतदाताओं को लुभाने और दिग्भ्रमित करते हुए गोलबंद करने में जुट गए हैं।

आखिर क्या है ई-ग्राम स्वराज एप्लीकेशन
प्रखंड में कार्यरत विभागीय जेई काजल और मनरेगा के पीटीए रत्नेश कुमार से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि वह समय अब लद चुका है, जब बगैर काम किए रुपए निकासी कर ली जाती है। इस डिजिटल युग में बगैर काम किए सरकारी राशि निकाल लेना कतई संभव नहीं है। पोर्टल पर प्रस्तावित योजना के साथ अनुमानित राशि को लोड किया जाता है। साथ ही प्रत्येक वर्ष किए जाने वाले काम को विभाग इस पोर्टल पर अपलोड करता है। जिसमें अनुमानित राशि लोड किए जाने के बाद काम शुरु करवाने के लिए फाइनल एस्टीमेट बनाया जाता है। जिसके बाद फेज वाय फेज काम करने के उपरांत जिओ टैग होने पर ही राशि की निकासी की जाती है। काम होने की बजाब्ता फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी करवाई जाती है।

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