स्थापना दिवस समारोह संपन्न:जिला बनाने की मांग को ले जनांदोलन खड़ा करने के संकल्प के साथ स्थापना दिवस समारोह संपन्न

बखरीएक महीने पहले
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बखरी अनुमंडल के स्थापना दिवस पर कैंडल जलाते लोग। - Dainik Bhaskar
बखरी अनुमंडल के स्थापना दिवस पर कैंडल जलाते लोग।
  • भाजपा नेता ने कहा- आजादी के बाद से ही बखरी शासन और प्रशासन के स्तर पर भेदभाव का शिकार होता रहा है

बखरी को जिला बनाने की मांग को लेकर जनांदोलन खड़ा करने के संकल्प के साथ बखरी अनुमंडल का 27वां स्थापना दिवस समारोह संपन्न हुआ। श्री विश्वबंधु पुस्तकालय के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता पुस्तकालय के अध्यक्ष डाॅ. विशाल केसरी ने की। मौके पर आयोजित विचार गोष्ठी में विषय प्रवेश करते हुए भाजपा नेता नगर पार्षद सिधेश आर्य ने कहा कि आजादी के बाद से ही बखरी शासन और प्रशासन के स्तर पर भेदभाव का शिकार होता रहा है। तमाम अहर्ताओं के बावजूद 90 के दशक तक अनुमंडल की स्थापना नहीं की जा सकी। नतीजा क्षेत्र की उपेक्षा से आजिज़ यहां के नौजवानों ने संघर्ष का रास्ता अख्तियार किया, जिसे आम जनता का सक्रिय सर्मथन मिला। सरकार झुकी और बखरी अनुमंडल बना। बावजूद आज तक यहां पूर्ण अनुमंडल स्तरीय अस्पताल, जेल, न्यायालय व नागरिक सुविधाओं का अभाव है।

जिला बनने की अहर्ताओं काे पूरा करता है बखरी
श्री आर्य के अनुसार, सत्ता और शासन के विकेन्द्रीकरण के लिए प्रखंड, अनुमंडल व जिला की स्थापना अनिवार्य है। बीते तीन दशकों से जनाकांक्षाओं के बावजूद बिहार में नए जिले की स्थापना नहीं हो सकी है। बखरी जिला बनने की तमाम अहर्ताओं को पूरा कर रहा है। तत्कालीन मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने जिला बनाओ संघर्ष समिति के प्रतिनिधि मंडल को सकारात्मक आश्वासन भी दिया था, जिसे अब तक पूरा नहीं किया गया है।

विचार गोष्ठी को इनलाेगाें ने किया संबाेधित
विचार गोष्ठी को बाइट कम्प्यूटर के निदेशक संजय कुमार, डाॅ आर एन झा, पुस्तकालय के पूर्व अध्यक्ष प्रेम किशन मन्नू, संरक्षण समिति के सदस्य वैद्यनाथ प्रसाद केसरी, राजकिशोर साह उर्फ एसपी, छोटू केसरी, कविराज शर्मा, निशांत वर्मा आदि ने भी संबोधित किया। डाॅ रमण झा के संयोजन में आयोजित स्थापना दिवस समारोह का संचालन प्रतिनिधि कौशल किशोर क्रांति ने किया। इससे पूर्व पुस्तकालय के अध्यक्ष व आगत अतिथियों ने केक काट कर स्थापना दिवस समारोह का शुभारंभ किया।

यह गीत हुआ था लाेकप्रिय
लगभग तीन दशक पूर्व तब के नामचीन कलाकार पूर्व मुखिया मनोहर केसरी ने अपने ही गाए कैसेट गीत, बखरी के नेता ललबबुआ रे, अनुमंडल बना; नहिंये बनैभी त मारतो रे, तनि जल्दी बना गाकर स्थापना दिवस समारोह में खूब तालियां बटोरीं। दरअसल, अनुमंडल आंदोलन के दौरान उनका यह गीत खूब लोकप्रिय हुआ था। आंदोलन कर रहे लोगों में यह गीत तब उर्जा का संचार करने का माध्यम बना था।

जनता को भ्रष्टाचार से मुक्ति हेतु आंदोलन जरूरी
गोष्ठी में पूर्व मुखिया मनोहर केसरी ने कहा कि बखरी के नौजवानों ने,यहां के आम अवाम ने अपने भुजाओं के जोर से अनुमंडल लड़ कर लिया। किन्तु जिन उद्देश्यों को लेकर अनुमंडल के लिए संघर्ष किया गया था, आज उसका घोर अभाव दिखलाई पड़ता है। जन पहल के संयोजक विकास वर्मा ने कहा कि सरकारी कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार नासूर बन चुका है। बिना लेन देन के कोई भी जनहित का कार्य नहीं होता है। जनता को भ्रष्टाचार से मुक्ति हेतु आंदोलन के लिए एक बार फिर से आगे आना होगा। वहीं कांग्रेस नेता कमलेश कंचन ने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी को अपनी विरासत समझनी होगी।

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