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पहल:डायरिया से बचने के लिए पांच साल से कम उम्र के बच्चों को मिलेगा ओआरएस

बक्सर21 दिन पहले
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  • आशा कार्यकर्ताओं को दिया गया प्रशिक्षण, कोविड काल के कार्यों की भी हुई समीक्षा

दस्त से होने वाले शिशु मृत्यु के प्रतिशत को शून्य करने के उद्देश्य से जिले में 15 से 31 जुलाई तक दस्त नियंत्रण पखवाड़ा का आयोजन किया जाएगा। इसके लिये स्वास्थ्य विभाग ने अपनी ओर से तैयारी पूरी कर ली है। इस क्रम में बुधवार को सदर पीएचसी में आशा कार्यकर्ताओं को दस्त नियंत्रण पखवाड़ा के लिये ट्रेनिंग दिया गया।

इस दौरान उन्हें बताया गया कि कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए आवश्यक है कि कार्यक्रम के अंतर्गत की जाने वाली गतिविधियों का सूक्ष्म कार्यान्वयन एवं अनुश्रवण किया जाएगा। सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा के दौरान अंतरविभागीय समन्वय द्वारा डायरिया की रोकथाम के उपायों, डायरिया होने पर ओआरएस जिंक के प्रयोग, उचित पोषण तथा समुचित इलाज के पहलुओं पर क्रियान्वयन किया जायेगा। इसके लिये स्वास्थ्य विभाग ने समस्त 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे तथा 5 वर्ष की उम्र तक के ऐसे बच्चे जो पखवाड़े के दौरान दस्त रोग से ग्रसित हुये हों, उनको लक्षित किया गया है।

इस क्रम में आशा कार्यकर्ताओं के कार्यों की समीक्षा भी की गई। जिसमें नियमित टीकाकरण सर्वे, डियूलिस्ट आशावार समीक्षा, परिवार नियोजन कार्यक्रम, कोविड -19 टीकाकरण, एनसीडी कार्यक्रम के उनके कार्यों का अवलोकन किया गया। ट्रेनिंग के दौरान आशा कार्यकर्ताओं के अलावा एमओआईसी डॉ. सुधीर कुमार, बीसीएम प्रिंस सिंह, केयर के बीएम अालाेक कुमार, प्रखंड प्रसार प्रशिक्षक मनोज चौधरी, सीएमओ श्वेता कुमारी, केयर आईसीटी राकेश कुमार समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी मौजूद रहे ।

क्षेत्रों में अभियान पर दिया गया अधिक बल
प्रशिक्षण के दौरान पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी (एमओआईसी) के द्वारा पखवाड़ा के दौरान कुछ विशेष क्षेत्रों में पर अधिक बल दिया गया । उन्होंने बताया, आशा कार्यकर्ताओं को ऐसे इलाकों पर विशेष ध्यान देना है, जहां उपकेंद्र पर एएनएम न हो अथवा लंबी छुट्टी पर हो, सफाई की कमी वाले स्थानों पर निवास करने वाली जनसंख्या क्षेत्र हो। साथ ही, अति संवेदनशील क्षेत्र- शहरी, झुग्गी-झोपड़ी, कठिन पहुंच वाले क्षेत्र, बाढ़

प्रभावित क्षेत्र, निर्माण कार्य में लगे मजदूरों के परिवार, ईंट भट्टे वाले क्षेत्र, अनाथालय तथा ऐसा चिह्नित क्षेत्र जहां दो-तीन वर्ष पूर्व तक दस्त के मामले अधिक संख्या में पाये जा चुके हों। इसके अलावा छोटे गांव, टोला, बस्ती, जहां साफ-सफाई, साफ पानी की आपूर्ति एवं व्यवस्था की सुविधाओं की कमी वाले क्षेत्रों में अभियान को सशक्त रूप से चलाना है।

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