उदासीनता / जलनिकासी पर करोड़ों खर्च किए, लेकिन जर्जर व टूटे नाले ही बने शहर की पहचान

Crores were spent on drainage, but the city became a shabby and broken drain
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Crores were spent on drainage, but the city became a shabby and broken drain

  • नगर परिषद के पदाधिकारियों को नहीं है चिंता, जगह-जगह गड्ढे खोद छोड़ दिए गए हैं बड़े नाले

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

बक्सर. शहर में करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जल निकासी की समुचित व्यवस्था अभी तक नहीं हो पाई है। इसका नतीजा यह है कि शहर के कई मोहल्लों में गंदा पानी भरा रहता है। इतना ही नहीं कई मोहल्लों में तो नाले चोक हैं। तो वहीं कई जगहों में लोगों ने नालियों पर अतिक्रमण करके व्यवस्था को और बिगाड़ दिया है। जिससे स्थिति और खराब हो गयी है। ये बातें आम लोगों की है। शहर के खास यानी नगर प्रशासन व्यवस्था तो इन तमाम शिकायतों के उपर है।

नगर के आईटीआई नहर पईन के किनारे बसे शिक्षक कॉलोनी की ओर का नाला अपनी बदतर हालत पर आंसू बहा है। अरसीसी नाले का निर्माण तो हुआ है। पर कई  जगहों पर कुछ-कुछ दुरी तक नाले की कटाई की गयी है। यह कटाई फिर से कंस्ट्रक्श के ऊद्देश्य से किये गये हैं। जो की कोरोना बंदी के बाद रोक दिया गया है। जिसका निर्माण अभी तक नहीं हुआ है। वहीं दुसरे साईड में पुराने चेयरमैन के घर से पश्चिम तो अभी तक कच्चे नाले ही है। जो अपनी दूर्दशा का जिम्मेवार नगर परिषद को बताने के लिये बेताब है।
घरों के सामने गड्ढा से बना रहता है खतरा: घर के सामने खोद कर छोड़ दिये गड्ढा से लोगों को उसमें गिरने का खतरा बना रहता है। सबसे अधिक भय बच्चों के प्रति अभिभावक में बनी रहती है। अकेले किनारे बसे घर वाले बच्चों को दरवाजे पर नहीं निकलने देत्व हैं। कई जगह पर दुकान के सामने भी गड्ढा खोदा गया है। जिससे दुकानदारों को काफी फजीहत होती है।
कहते हैं कार्यपालक
इस संबंध बातचीत के क्रम में कार्यपालक अधिकारी सुजित कुमार ने कहा कि अर्द्धनिर्मित कार्यों को पूरा करने के लिये हरी झंडी दे दी गयी है। जिन संवेदक को मजदूरों की उपलब्धता हो जा रही वे धीरे-धीरे कार्य शुरु किया जा रहा। हालांकि अभी तक शहर में कहीं कार्य शुरू नहीं हुआ है।
बरसात में जलजमाव का करना पड़ सकता है सामना: यदि वास्तु स्थिति यूं ही बना रहा तो शहरवासियों को पूर्व के वर्ष की भांति इस बर भी भयंकर जलजमाव का सामना करना पड़ सकता है। वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए यह कहना भी गलत नहीं होगा कि शहर में जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। वहीं तमाम नए मोहल्ले कुछ इस तरह से बसे हैं जहां पानी निकास की कोई व्यवस्था ही नहीं है। शहर की विभिन्न कालोनी में पानी के निकास के लिए कोई नाला ही नहीं है। जिसका उदाहरण आईटीआई फील्ड व नयाबाजर स्थित वार्ड संख्या 6 है।

इससे यहां हर मौसम में खाली पड़े प्लाटों में जल भराव रहता है। यहां जो पानी तालाब में जाता भी है वहां लोगों ने नालियों पर अतिक्रमण कर उन्हें ऊंचा कर दिया है। कई लोगों ने इसकी शिकयतें भी की। लेकिन नगर प्रशासन ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया। शहर के मोहल्ला शिवपुरी व वनसप्ति  नगर में नाला पानी निकास कर आगे जाने के लिये अभी तक नहीं बना है। उसका पानी किसी तरफ निकालने की कोई व्यवस्था ही नहीं है। इससे स्थानीय मोहल्लों में लोगों के घरों तक पानी भरता है।

इसके अलावा सोहनिपट्टी व अन्य नये मुहल्लों में भी खाली प्लाटों में थोड़ी बरसात होने पर ही जल भराव होता रहता है। शहर की नई बसी कालोनी में गंदेपानी के निकास की कोई व्यवस्था नहीं है। शहर के अधिकांश बाहरी मोहल्लों में भी यही स्थिति है।

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