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आस्था:नवरात्रा आज से, घोड़े पर सवार होकर आएंगी माता रानी, भैंसे पर सवार हो जाएंगी

बक्सर6 दिन पहले
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आज कलश स्थापना के साथ नवरात्र शुरू हो जाएगा। आज से माता के नौ रूपों की पूजा की तैयारी शुरू हो गयी है। इस बार शारदीय नवरात्र में मातारानी घोड़े पर सवार होकर आएंगी। इसके लिए गांव गांव में साफ सफाई का दौर भी चल रहा है। शनिवार को घोड़े पर सवार होकर माता रानी आ रहीं हैं। घोड़ा युद्ध का प्रतिक माना जाता है।

घोड़े पर माता का आगमन शासन व सत्ता के लिए अशुभ माना जाता है। सरकार को विरोध का सामना करना पड़ सकता है। सत्ता परिवर्तन का योग बनता है। शक्ति की उपासना का पर्व शारदीय नवरात्र प्रतिपदा से नवमी तक निश्चित नौ तिथि, नौ नक्षत्र, नौ शक्तियों की नवधा भक्ति के साथ सनातन काल से मनाया जा रहा है।

नवरात्रि 17 अक्टूबर 2020 शनिवार से शुरू होगा। वहीं विजयादशमी 25 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस बार नौ दिनों में हीं दस दिनों का पर्व पुरा हो जाएगा। 24 अक्तूबर को सुबह सुबह 6 बजकर 58 मिनट तक अष्टमी है। फिर उसके बाद नवमी लग जाएगी। दो तिथियां एक हीं दिन पड़ रही है। इसलिए अष्टमी व नवमी की पूजा एक हीं दिन की जाएगी। जबकि नवमी के दिन सुबह 7 बजकर 41 मिनट के बाद दशमी तिथि लग जाएगी।
मां की पूजा करने से सभी बाधाओं से मिलती है मुक्ति
सूर्य मंदिर के पुजारी आचार्य आशुतोष पाण्डेय के अनुसार मां की पूजा अर्चना करने से सभी बाधाओं से मुक्ति मिलती है। नौ दिनों तक अलग - अलग माताओं की विभिन्न पूजा उपचारों से पूजन, अखंड दीप साधना, व्रत उपवास, श्री दुर्गा सप्तसती व नवार्ण मंत्र का जाप करें। नवमी को हवन और नौ कन्याओं की पूजन करें।
पूजा के लिए इन चीजों की पड़ती है जरूरत
आज से शुरू होने वाले शारदीय नवरात्र घट स्थापना व पूजन करने के लिए विशेष संयोग बन रहा है। इसमें से इन चीजों का होना महत्वपूर्ण है। माँ दुर्गा की प्रतिमा अथवा चित्र, लाल चुनरी, आम की पत्तियाँ, चावल, श्री दुर्गा सप्तशती की पुस्तक, लाल कलवा, गंगाजल, चंदन, नारियल, कपूर, जौ के बीज, मिट्टी का बर्तन,गुलाल, सुपारी, पान के पत्ते, लौंग, इलायची, रोरी, सिंदूर, घी, रूई, धूप, इत्यादि पूजा की थाल में होना जरूरी है।

कलश स्थापना के लिए विशिष्ट मुहूर्त

  • 17 अक्टूबर 2020 दिन शनिवार सुबह 6 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर 10 बजकर 13 मिनट तक।
  • अभिजित मुहूर्त 11 बजकर 44 मिनट से 12 बजकर 29 मिनट तक।
  • हालांकि काशी विश्वनाथ पंचांग के अनुसार इस बार रात्रि तक प्रतिपदा होने से कलश स्थापना के लिए भक्तों के पास पर्याप्त समय है। प्रातः काल से शाम तक पर्याप्त कभी भी कलश स्थापन कर सकते हैं।

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