प्रवासियों का छलका दर्द / स्पेशल ट्रेन से उतरे ही बोले- नून-भात खा लेंगे, कमाने खातिर परदेस नहीं जाएंगे

He got off the special train and said - I will eat noodle and rice, I will not go to foreign countries for my earning
X
He got off the special train and said - I will eat noodle and rice, I will not go to foreign countries for my earning

  • स्पेशल ट्रेन से स्टेशन पर उतरते ही प्रवासी श्रमिकों ने कहा- अब यहीं रहकर गुजारा कर लेंगे
  • गांव-टोला में फेरी लगाकर जीवन-यापन कर लेंगे, पर परिवार को छोड़कर अब बाहर कमाने नहीं जाएंगे

दैनिक भास्कर

May 30, 2020, 05:00 AM IST

बक्सर. अब कमाने के लिए बाहर नही जाएंगे। भले ही गांव-टोला में फेरी करना पड़े, या कुदाल चलाना पड़े। अपने गांव में ही पसीना बहाएंगे। माड़ के साथ नून-भात (नमक-चावल) खाकर गुजारा कर लेंगे, लेकिन अब बाहर कमाने के लिए नहीं जाएंगे। परदेश में फंसने के बाद दिमाग खुल गया। बच्चे परेशान हो गए हैं। खाने पीने की भी परेशानी होने लगी थी। बचाया हुआ पैसा भी खर्च हो गया। भूखे पेट सोना पड़ा। यह कहना था भिलवाड़ा से पूर्णिया जाने वाली श्रमिक स्पेशल ट्रेन में सवार राजस्थान से आने वाले राजदेव, गोबिंद, मंतोष, अमरेंद्र का.. जो पिछले दो माह से लॉकडाउन को वहां झेल रहे थे।

ट्रेन सेवा के शुरू होने पर रेलवे को शुक्रिया कहते हुए कहा कि किसी भी तरह गांव तो पहुंच गए। यहां खेती करेंगे। कुछ भी करेंगे परंतु अपने बच्चे व परिवार को वहां नही ले जाएंगे। इटाढ़ी क्षेत्र के महिला गांव निवासी परमजीत कुमार जो कि कपड़े की मिल में काम करते हैं। उन्होंने बताया कि टिकट का भाड़ा नहीं लगा। गुरुवार की शाम ट्रेन राजस्थान से खुली जो शुक्रवार की शाम चार बजे बक्सर स्टेशन पहुंची। वहीं कवलपोखर के रहने वाले गोपीनाथ सिंह ने कहा कि काम-धंधा बंद होने के बाद से दिक्कतें हो रही थीं। अजमेर से लौटे असलम नट ने बताया कि उसे 450 रुपए एक दिन की मजदूरी मिलती थी।

जीवन-यापन के लिए मजदूरी करेंगे: किंतु काम बंद हो जाने के कारण मजदूरी पर भी आफत आ गया। ऐसे में यहां आना मजबूरी हो गया। वहीं इटाढ़ी के पहाड़पुर के रहने वाली गायत्री ने कहा कि अब बहुत हो गया। माड़ भात खाएंगे पर अब बाहर नही जाएंगे। यहीं मजदूरी कर अपना जीवन यापन करेंगे। ट्रेन से उतरने वाले कई मजदूरों ने कुछ इसी तरह का संकल्प लिया।
सजग हो जा रहे हैं अफसर व कर्मी
श्रमिक ट्रेन के आने के पहले न केवल जिला प्रशासन की टीम बल्कि रेल प्रशासन भी सजग हो जा रहा है। प्लेटफॉर्म पर पहुंचने के दस मिनट पहले से ट्रेनों की आने की घोषणा होने लगती है। जिससे सभी सजग हो जा रहे हैं। 

तैनात रहे अफसर 
वाहन कोषांग के नोडल अफसर मनोज कुमार रजक व श्रम अधीक्षक जगतानंद दूबे व स्टेशन सुपरिटेंडेंट अपनी ड्यूटी पर तैनात दिखे। डीटीओ ने यहां उतरने वाले श्रमिकों को बस के माध्यम से बिहार पब्लिक स्कूल पहुंचवाने में जुटे रहें। शुक्रवार को वापी देवघर एक्सप्रेस, सीएसटीएम पटना, लोकमान्य तिलक दरभंगा,कोयम्बटूर मुजफ्फरपुर श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेन आदि पहुंची। सभी ट्रेनें यहां ठहर रही हैं।

ट्रेन में ही गर्भवती ने दिया बच्चे को जन्म, दोनों स्वस्थ

लुधियाना से अपने गांव लौट रहे चंदन यादव की पत्नी ने ट्रेन की बोगी में ही बच्चे को जन्म दिया। इसकी सूचना मिलते ही यहां का प्रशासन पूरी तरह से सजग हो गया और ट्रेन के ठहरते ही महिला और नवजात को सही सलामत बोगी से उतारा गया। जहां बच्चा व मां दोनों स्वस्थ मिलीं। वाहन कोषांग के नोडल प्रभारी सह डीटीओ मनोज कुमार रजक ने तत्काल एंबुलेंस से उन्हेंे सदर अस्पताल भेजवाया। जहां से इलाज के बाद उसे भेज दिया गया। बता दें कि गुरुवार की देर शाम लुधियाना-आरा श्रमिक स्पेशल ट्रेन बक्सर पहुंची। जिसमें ये परिवार था। महिला बोक्सा की रहने वाली है। ट्रेन में ही उसे प्रसव पीड़ा हुई और उसने बच्चे को जन्म दिया। जन्म के बाद बच्चा स्वस्थ दिखा।

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना