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धर्म-अध्यात्म:श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से सारे संताप मिट जाते हैं : स्वामी

ब्रह्मपुर5 महीने पहले
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  • तेज पांडेयपुर के त्रिदंडी स्वामी आश्रम राधाकृष्ण मंदिर के प्रांगण में चल रहा है श्रीमद्भागवत सप्ताह

तेज पांडेयपुर के त्रिदंडी स्वामी आश्रम राधाकृष्ण मन्दिर के प्रांगण में चल रहे श्रीमद्भागवत सप्ताह के दूसरे दिन प्रवचन करते हुए स्वामीजी ने उपस्थित भक्तों से भागवत कथा की महिमा बताते हुए कहा कि जिस जगह पर श्रीमद्भागवत कथा शुरू हो जाती है, वहा विष्णु भगवान अदृश्य रूप से विराजमान हो जाते हैं।

बेशक वे हमें दिखाई नहीं देते क्योंकि उन्हें देखने के लिए हमारे पास दिव्य आंखें नहीं है।कथा को आगे बढ़ाते हुए आचरण की व्याख्या उन्होंने बड़े सरल तरीके से किया और कहा कि जिसके आचरण शुद्ध होते हैं पैर उसके ही पूजे जाते हैं, रावण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि रूपवान, गुणवान, विद्वान, धनवान, कुलवान सभी गुण होते हुए भी उसका आचरण सही नहीं था इसलिए सब कुछ होते हुए भी उसका विनाश हुआ।

इसलिए हर एक मनुष्य को अपने आचरण का विशेष महत्व देना चाहिए नहीं तो सब कुछ होते हुए भी वह निंदा का पात्र बन जाता है। प्रसंगवश मनु सतरूपा की कथा को विस्तार देते हुए कहा कि इस संसार में आने का उद्देश्य आत्मदर्शन है। आत्मदर्शन की सरल विद्या का नाम,सहज मार्ग का नाम श्रीमद्भागवत है।

इसमें 18000 श्लोक, 12स्कंध और 335अध्याय है। इन सबमें भक्ति, ज्ञान, वैराग्य संपाेषणीय सिद्धांत का प्रतिवादन हुआ है। श्रीकृष्ण की कृपाकटाक्ष की सहज ही अनुभूति होती है भागवत में।भागवत की कथा मोक्षदायिनी कथा है।इस कथा के श्रवण मात्र से जीवन की व्यथा मिट जाती है।
सोलह वर्षों से की जा रही पूजा
उद्धव स्वामी ने कहा कि भगवान विष्णु के रुप रंगनाथ का विवाह गोदाम्बा जी के साथ हुआ था। वहीं उत्सव पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। महंत जगतगुरु उद्धव स्वामी अनुसार सोलह वर्षों से भी ज्यादा समय से यह उत्सव प्रखंड के तेजपाण्डेयपुर में मनाया जाता रहा है।

शादी के दिन झांकी के रुप में पदयात्रा निकलती है। भगवान रंगनाथ को पालकी में बैठाकर सभी लोग ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर जा आते हैं। वापस पुनः राधा-कृष्ण मंदिर लौट अत्तर हैं। जहां वैदिक परंपरा के अनुसार गोदा जी का विवाह भगवान रंगनाथ के साथ होता है। जिसकी तैयारियां पूरी कर ली गई है।
भागवत कथा सुने तो पाप धूल जाएंगे: वहीं भगवान गोदा-रंगनाथ विवाह के पूर्व संध्या पर प्रवचन करते हुए उद्धव प्रपन्नाचार्य स्वामी जी ने कहा कि मनुष्य रात-दिन महापाप करता है, यदि सच्चे मन से भागवत कथा सुने तो उसके पाप धूल जाएगें। वह उसी समय से सदाचारी व संस्कारी बनने लगेगा। ज्ञान व बुद्धि यानि सरस्वती को ब्रम्हा जी ने ही बनाया। इसलिए भागवत कथा का महत्व और बढ़ जाता है। स्वमी जी ने कहा कि भागवत कथा एक ऐसा ग्रंथ है जिससे ज्ञान व बुद्धि दोनों मिलती है। भोग विलास व नास्तिक लोग मठ एवं मंदिरों में पहुंच गए हैं। इनसे संसार का कल्याण कभी नहीं होगा।

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