पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

ग्रामीणों का आरोप:महुआर के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बंधते हैं मवेशी, इलाज के लिए ग्रामीण जाते हैं 15 किलोमीटर दूर

ब्रह्मपुरएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • दशकों पहला गांव में बन गया एपीएचसी, लेकिन यहां कभी नहीं हो सके किसी भी चिकित्सक के दर्शन

प्रखंड की महुआर पंचायत का अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र मवेशियों का तबेला बनकर रह गया है। वर्षों पूर्व बनाया गया दो कमरे का स्वास्थ्य केंद्र आज बर्बादी की कगार पर है। ग्राम के ग्रामीणों की मानें तो इस स्वास्थ्य केंद्र पर आज तक डॉक्टर का दर्शन नहीं हुआ। जो कि सरकार के स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोलने के लिए काफी है।

बक्सर केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री का संसदीय क्षेत्र भी ही। साथ गी राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय बक्सर जिले के प्रभारी मंत्री हैं। सरकारी उपेक्षा के कारण आज यह अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र अपना अस्तित्व बरकरार रखने के लिए खड़ा है। ग्रामीण बताते हैं कि स्वास्थ्य केंद्र पर दूज की चांद की तरह कभी-कभी एएनएम दिखती हैं। वह भी सिर्फ महीने में एक बार। जब उन्हें पोलियोरोधी दवा की खुराक देने के लिए आना पड़ता है। इस दौरान वे गांव के सभी पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को दवा पिलाए चली जाती हैं। कई बार ग्रामीणों ने इसकी शिकायत की है, लेकिन कभी कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई।

गांव के लोगों ने बताया कि यहां इलाज की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण हमलोगों को 15 किलोमीटर दूर जाकर रघुनाथपुर में इलाज कराना पड़ता है। कई बार चोट लग जाने या गांव में किसी की दुर्घटना हो जाने के बाद यहां उसका प्राथमिकी उपचार तक नहीं हो पाता है। आनन-फानन में लोग उसे रघुनाथपुर ले जाते हैं। जहां जाते-जाते मरीज की हालत और गंभीर हो जाती है। सबसे अधिक परेशानी गांव की गर्भवती महिलाओं को झेलनी पड़ती है। जिन्हें भी इलाज और जांच के लिए 15 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है।

कोई देखने-सुनने वाला नहीं
बता दें कि महुआर पंचायत में बना स्वास्थ्य केंद्र करीब एक एकड़ से अधिक भूमि में फैला है। पंचायत के गरीब किसानों के प्रयास से जमीन दान देकर स्वास्थ्य केंद्र का दो कमरे वाला भवन निर्माण करवाया गया था। गोकुल जलाशय के समीप निर्मित यह स्वास्थ्य भवन आज कबाड़खाने का उदाहरण देने लायक है। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र खुज ही बीमार है, तो फिर ये मरीजों का इलाज कैसे करेगा। अब यह पालतू पशुओं का डेरा बन चुका है। इसके साथ ही यहां लोगों की आवाजाही कम होने के कारण धीरे-धीरे ये स्थान नशेड़ियों और जुआरियों का भी अड्‌डा होते जा रहा है।

जिस कारण स्थानीय लोगों में भय का माहौल रहता है। सुबह में गांव के कुछ पशुपालक यहां गोबर से बना हुआ गोईठा में रखते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि हमलोगों ने कई बार इसकी शिकायत बीडीओ से की है। सिविल सर्जन से भी स्वास्थ्य केंद्र की दुर्दशा छिपी नहीं है, लेकिन कभी किसी प्रशासनिक अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने इसके सुधार के लिए कार्य नहीं किया है।

खबरें और भी हैं...