आक्रोश:साहित्यकार दयाशंकर सिन्हा का फूंका पुतला

बक्सर7 दिन पहले
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भारत के स्वाभिमान व गौरवशाली भारत के निर्माता चक्रवर्ती सम्राट अशोक के विरुद्ध अपमान जनक टिप्पणी को भारत की जनता कभी स्वीकार नहीं कर सकती हैं, अपने पराक्रम और समाज सुधार के कार्यों से भारत को पूरी दुनिया में गौरव दिलाया।

सम्राट अशोक ने दुनिया भर में शांति के संदेश को फैलाया है उनके ऊपर नाटककार दया प्रकाश सिन्हा ने अपनी रचनाओं में और इस संदर्भ में दिए गए साक्षात्कार में उन महान शख्सियत के खिलाफ अभद्र और अपमान जनक टिप्पणी एवं उनके विरुद्ध आधारहीन तर्क बर्दाश्त योग्य नहीं है। साथ ही इतिहास विरुद्ध बात लिख कर न सिर्फ बिहार के समान को ललकारा गया है बल्कि भारत की अस्मिता पर भी हमला है। सम्राट अशोक का लाट की मूर्ति आज भारत सरकार का राष्ट्रीय प्रतीक है।

यही नहीं उनका चक्र भारत मां के तिरंगे की शान है दया प्रकाश सिन्हा का यह कृत्य देशद्रोह की श्रेणी में आता है, अफसोस की बात है कि उसी पुस्तक के लेखक को साहित्य अकादमी पुरस्कार और पद्मश्री का सम्मान दिया गया है। उक्त टिप्पणी के विरोध में महात्मा फुले समता परिषद द्वारा गुरुवार को नगर के ज्योति प्रकाश चौक पर दया प्रकाश सिन्हा का पुतला दहन किया गया और मांग किया गया कि दया शंकर सिन्हा को भारत सरकार द्वारा दिए गए पद्म श्री और साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित सभी पुरस्कार वापस लिए जाएं।

उनके ऊपर राष्ट्र के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने के आरोप में देशद्रोह का मुकदमा किया जाए। उनके द्वारा लिखित सम्राट अशोक से संबंधित पुस्तक पर प्रतिबंध लगाया जाए। पुतला दहन के पश्चात मांग पत्र की कॉपी महामहिम राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को अविलंब कार्रवाई के लिए भेजा गया।

केंद्र सरकार की तरफ से इस संदर्भ में तत्काल कार्रवाई नहीं किए जाने पर महात्मा फुले समता परिषद आगे भी सवाल पर अभियान चलाएंगे। पुतला दहन की अध्यक्षता जिला संयोजक दीनानाथ ठाकुर ने किया जबकि मौके पर बिहारी पासवान, शिव प्रसाद कुशवाहा, सत्येंद्र कुशवाहा, विजय कुशवाहा, विंध्याचल कुशवाहा, संतोष गोंड, प्रेम कुशवाहा, प्रकाश कुशवाहा, हिटलर कुशवाहा, राजेश कुशवाहा नगर अध्यक्ष जदयू, हीरा सिंह कुशवाहा समेत सैकड़ों लोग शामिल रहे।

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