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लापरवाही पड़ सकती है महंगी:कोरोना संक्रमण को लेकर हो रही भारी लापरवाही, सिर्फ कागजों में बन रहा है माइक्रो कन्टेनमेंट जोन

बक्सर9 दिन पहले
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बक्सर के बाजार में लगी भीड़। - Dainik Bhaskar
बक्सर के बाजार में लगी भीड़।

जिले में कोरोना संक्रमण तेज हो रहा है। लेकिन, यह समझने के लिए ना तो प्रशासन तैयार है ना पब्लिक। एक तरफ कोविड को लेकर जिला प्रशासन बैठकों पर बैठक कर रहा है। अधिकारियों को कोरोना संक्रमण को लेकर तैनाती की जा रही है। परंतु जिले में इसका असर कहीं नहीं दिखाई दे रहा है। यहां तक जिले का कलेक्ट्रेट परिसर में भी पुलिसकर्मी बिना मास्क के नजर आए।

सवाल यह है कि आखिर ये नियम कानून केवल कागजों में ही बनते है और अखबारों में छपवाने के लिए ही या फिर इन नियमों का पालन भी होगा। बता दें कि जिले के सभी शिक्षण संस्थान बंद कर दिए गए हैं। परंतु सवाल है कि क्या शिक्षण संस्थानों को बंद कर दिए जाने भर से इन नियमों का पालन सुनिश्चित हो जाता है। क्या कोरोना वायरस केवल विद्यालयों में हीं पहुंचता है।

एक तरफ सब कुछ पूर्व की भांति चल रहा है तो वहीं दूसरी तरफ केवल विद्यालयों को बंद कर कोरम पुरा किया जा रहा है। ऐसे में जिले के नागरिकों में कोविड के प्रति भ्रम की स्थिति बनी हुई है। आमतौर पर लोग बात करते हुए आसानी से दिख जाएंगें कि कोरोना कुछ है ही नहीं।

लोग सरकार से सवाल पूछते हुए नजर आते हैं कि जहां चुनाव है वहां कोरोना नहीं तथा जहां चुनाव नहीं है वहां नियम कायदे बताए जाते है। जबकि उन्हीं नियम कानूनों का पालन नहीं किया जा रहा है।

प्रशासन को नहीं पता कि कोरोना के मरीज मिले हैं या नहीं
बता दें कि जिले में कोरोना संक्रमण के मामले सामने आने के बाद दैनिक भास्कर ने कोरोना संक्रमण वाले इलाके राजपुर, इटाढी, ब्रह्मपुर, चौगाई तथा डुमरांव के विभिन्न इलाकों का भ्रमण किया। जहां कोरोना संक्रमण के मामले मिले थे। परंतु कंन्टेनमेंट जोन बनाने की बात छाेड़िए। वहां के स्थानीय प्रशासन को नहीं पता था कि कोरोना के मरीज मिले हैं या नहीं। जबकि संबंधित बीएचएम भी यह जानकारी नहीं दे सके।

अब सवाल यह है कि क्या केवल कागजों में हीं कंन्टेनमेंट जोन बनाए जाते हैं। जबकि धरातल पर इसका असर नहीं दिखाई दे रहा है। ऐसे में यदि किसी को संक्रमण हो जाए तो आस-पास के लोग कैसे सुरक्षित रह सकेंगे। कैसे पता चलेगा कि यहां कोरोना संक्रमण के मरीज हैं।

भीड़-भाड़ वाले इलाकों से पुलिस गायब
दूसरी ओर डीएम अमन समीर ने बैठक के दौरान यह निर्देश दिया था कि भीड़ भाड़ वाले इलाकों में पुलिस बल की तैनाती की जाए। परंतु पुलिस की तैनाती तो दूर की बात यहां तो पुलिस समेत अन्य सरकारी कार्यालयों में भी मास्क नहीं लगाया जा रहा है।

आप जिले के किसी भी चौक,चौराहों, स्टेशन व बसों में पहले की तरह भीड़ दिखाई देगी। जबकि इन स्थानों पर किसी भी प्रकार की कोई पुलिस बल नहीं है तथा न हीं इससे संबंधित प्रचार प्रसार कराया जा रहा है। जबकि मास्क को लेकर रोको टोको अभियान भी नहीं चलाया जा रहा है।

विद्यालयों को बंद करने से नाराज अभिभावक
दूसरी ओर शिक्षण संस्थानों को बंद करने के कारण अभिभावक नाराज दिखाई दिए। लोगों का कहना था कि जब हर जगह भीड़ है। कहीं प्रशासन दिख नहीं रहा है तो फिर विद्यालय बंद करने का क्या औचित्य है। एक तरफ चुनावों में भारी भीड़ देखी जा रही तो दूसरी ओर विद्यालयों को बंद करके केवल यह दर्शाया जा रहा है कि एहतियात बरता जाए। सवाल यह है कि केवल विद्यालयों को बंद कर दिए जाने से संक्रमण में कमी आ सकती है क्या।

वहीं बता दें कि जिले में एक्टिव मरीजों की संख्या 41 तक पहुंच गयी है। फिर भी भीड़ भाड़ वाले इलाकों में एहतियात नहीं बरती जा रही है। सिविल सर्जन डाॅ. जितेन्द्र नाथ ने बताया कि मंगलवार तक एक्टिव मरीजों की संख्या 41 तक पहुंच चुकी थी। जहां एक्टिव मरीज मिल रहे हैं वहां अवश्य माईक्रो कंन्टेनमेंट जोन बनाकर लोगों को सावधानी बरतने की सलाह देनी चाहिए। ताकि लोग जागरूक हो सकें।

लापरवाही : कार्यालयों में नहीं लगा रहे मास्क

दूसरी ओर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित जिला परिवहन कार्यालय में पुरी तरह से न मास्क तथा न ही सोशल डिस्टेंस का पालन किया जा रहा है। जब मौजूद होम गार्ड के जवानों से मास्क के बारे में पूछा गया तो कैमरा देखकर मास्क लगाते नजर आए। वह भी नाक के नीचे। यहीं हाल उसमें मौजूद कर्मियों का था। जहां नाक के नीचे मास्क लगाकर कोरम पूरा किया जा रहा है।

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