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कोविड-19 के चलते पूरे साल बंद रहे स्कूल:स्कूलों में नहीं हुई पढ़ाई, खुद के दम पर छात्र-छात्राओं ने सफलता पाई

बक्सर12 दिन पहले
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मैट्रिक परीक्षा की रिजल्ट आने के बाद खुशी मनाते छात्र छात्राएं। - Dainik Bhaskar
मैट्रिक परीक्षा की रिजल्ट आने के बाद खुशी मनाते छात्र छात्राएं।
  • घरों में कैद छात्र-छात्राएं करते रहे सेल्फ स्टडीज
  • परीक्षा की तैयारी के लिए मोबाइल बना सहारा, किताबों से छात्र-छात्राओं ने जोड़ा नाता

कोविड-19 के चलते पूरे साल विद्यालयों में पठन-पाठन का कार्य पूरी तरह से ठप रहा। ऐसे में छात्र छात्राओं की पढ़ाई नहीं हो पाई। बावजूद छात्र-छात्राओं ने हार नहीं मानी। घरों में कैद छात्र छात्राओं ने खुद की मेहनत से इस बार मैट्रिक परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन किया है। अगर ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं की बात की जाए तो सीमित संसाधनों में उनका प्रदर्शन काफी काबिले तारीफ रहा है। छात्र-छात्राओं की माने तो कोरोना काल में परीक्षा की तैयारी के लिए मोबाइल और किताब उनका सहारा बना।

इसके अलावा दूरदर्शन के माध्यम से सरकार ने जो पढ़ाई शुरू की, इससे भी कुछ फायदा मिला। आरती कुमारी ने बताया कि कोविड-19 के चलते जब स्कूलों में पढ़ाई बंद हो गई, तब तनाव काफी बढ़ गया। समझ में नहीं आ रहा था कि परीक्षा की तैयारी अब कैसे की जाए। लेकिन कुछ दिन के बाद सब कुछ सामान्य होने लगा। सेल्फ स्टडी ही एक मात्र सहारा था। खुद से तैयारी शुरू की। कुछ ही दिनों में अच्छी खासी तैयारी हो गई। परीक्षा को लेकर इतना डर नहीं लग रहा था। परिणाम भी बेहतर रहा।

पहली बार बिना पढ़े बच्चों ने दी परीक्षा
इस बार किसी भी छात्र ने 10वीं के क्लासरूम में कदम नहीं रखा। इतिहास में पहला ऐसा मौका है, जब बिना पढ़े ही बिहार बोर्ड के बच्चे मैट्रिक परीक्षा दे रहे हैं। कोरोना के कारण 24 मार्च को बिहार सहित पूरे देश में पहला लॉकडाउन लगाया गया। इसके बाद से स्कूल बंद हो गए। 226 दिन बाद 11 नवंबर को सिर्फ सेंटअप एग्जाम देने के लिए बच्चों ने स्कूल का मुंह देखा। इसके 95 दिन बाद 4 जनवरी से 8वीं से ऊपर के स्कूल तो खुले, लेकिन इससे इन छात्रों को कोई लाभ नहीं हुआ, क्योंकि सेंटअप के बाद परंपरा के तहत इन्हें पढ़ाया नहीं गया।

बिहार के सरकारी स्कूलों में सेशन अप्रैल में शुरू होता है। सालभर में 60 दिन सरकारी छुट्टियां और 54 रविवार को जोड़ कर कुल 114 दिनों की छुट्टियां रहती हैं। साल के 365 दिन में 114 दिन घटा दीजिए तो एक सेशन में 251 दिन की पढ़ाई होती है। 10वीं के बच्चों की पढ़ाई इससे भी कम होती है, क्योंकि सेंटअप एग्जाम नवंबर में ही हो जाता है। मोटे तौर पर देखें तो सात महीना यानी 210 दिन, लेकिन इसबार पूरा सेशन ही लैप्स कर गया।

101 छात्र टॉप 10 में बक्सर के एक भी नहीं : बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने मैट्रिक की परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया है। इस बार 78.17 प्रतिशत परीक्षार्थी पास हुए हैं। जमुई की पूजा और रोहतास के संदीप टॉपर हुए हैं। टॉप 10 में इसबार कुल 101 छात्र-छात्राएं शामिल हैं। लेकिन अफसोस की बात है कि इस बार जिले के एक भी छात्र- छात्राएं टाप टेन में शामिल हैं। कोरोना के बीच एग्जाम कराना समिति के लिए बड़ी चुनौती थी, लेकिन 40 दिन के भीतर ही बोर्ड ने रिजल्ट देकर नया इतिहास रच दिया है।

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