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परिक्रमा:गंगा आरती व गगनभेदी जयकारों के साथ शुरू हुई पंचकोशी परिक्रमा

बक्सर3 महीने पहले
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  • माता अहिल्या की हुई पूजा, भक्तों ने किया पूआ-पूड़ी रूपी प्रसाद को ग्रहण, पंचकोशी परिक्रमा के दूसरे दिन आज नदांव पहुंचेगी संतों श्रद्धालुओं की टोली, भक्तिमय हुआ पूरा इलाका

विश्वप्रसिद्द पंचकोशी मेला आज से मिनी काशी कही जाने वाली धार्मिक नगरी बक्सर में शुरू हो गया। यह मेला 9 दिसम्बर तक चलेगा। हालांकि कोरोना के कारण पहले की अपेक्षा इस बार श्रद्धालुओं की संख्या कम रही। श्री रामरेखा घाट बक्सर से मां गंगा की आरती और गगनभेदी जयकारों के साथ आज से शुरू हुई पंचकोशी परिक्रमा यात्रा में पूज्य संत छोटी मठिया के महाराज अनुग्रह नारायण स्वामी, श्री सुदर्शनाचार्य, श्री कुलशेखरचार्य, श्री उद्धवआचार्य, संयुक्त सचिव सूबेदार पाण्डेय सहित अनेक कार्यकर्ता गण संकीर्तन करते हुये श्री अहिल्या आश्रम अहिराैली धाम पहुंचे।

परिक्रमा के पहले दिन दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं की भीड़ अहले सुबह बक्सर से गंगा स्नान कर अहिराैली पहुंची जहां माता अहिल्या की पूजा अर्चना करने के बाद माता के मंदिर में दीप दान किया तत्पश्चात भक्तों ने पुआ और पकवान बनाएं तथा प्रसाद के रूप में उसे ग्रहण किया। समिति के सचिव डॉ रामनाथ ओझा ने कहा कि अहिराैली प्रथम पड़ाव स्थल पर पंचकोशी मेले की शुरुआत बक्सर सांसद सह केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने वर्चुअल उद्घाटन से संपन्न किये।

इस कार्यक्रम में पंचकोशी मेलार्थियों के साथ साथ एसडीओ कृष्ण कुमार उपाध्याय, भाजपा नेता परसुराम चतुर्वेदी, जीतेन्द्र कुमार चौबे झब्बू , नितिन कुमार सहित अहिराैली आश्रम के पदाधिकारी गण भी सम्मिलित हुए। कोविड-19 का रखा गया ध्यान। सचिव ने बताया कि संक्रमण के प्रभाव से बचने को लेकर श्रद्धालुओं से मास्क पहनने व सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन करने की अपील की जा रही है।

बक्सर में पांच जगहों पर की थी यात्रा

मान्यता है कि गुरु विश्वामित्र से शिक्षा लेने के समय भगवान श्री राम ने बक्सर में पाँच जगहों की यात्रा की थी और उस दौरान पांचों जगहों पर अलग-अलग प्रकार का भोजन किया था। इस यात्रा में पहले दिन उन्होंने अहिराैली में पूड़ी पकवान खाने के बाद अगले दिन नदांव में कभी नारद मुनी के आश्रम में को सत्तु और मूली खायी थी। तीसरे दिन भभुअर में जहाँ भार्गव ऋषि के आश्रम में उन्होंने चूड़ा-दही तथा गुड़, वहीं चौथे दिन उद्दालक ऋषि के आश्रम बड़का नुअांव में उन्होंने खिचड़ी खायी थी। पांचवे तथा अंतिम दिन श्री राम ने चरित्रवन में अपने गुरु महर्षि विश्वामित्र ऋषि के आश्रम में लिट्टी-चोखा का भोजन किया था। उस समय से लेकर आज तक पांचों जगहों पर जा कर अलग-अलग तरीके के प्रसाद रुपी भोजन को ग्रहण किया जाता है। मंदिर के आस – पास एक मेला लगा था। जिसमें प्रसिद्ध गुरही जलेबी, चाट-चूला समेत पूजा सामग्री तथा खिलौनों की अनेक दुकानें लगी हुई थी। बच्चों के लिए विशेष झूले मेले में लगे हुए थे।

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