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कक्षाओं के संचालन की तैयारी:संक्रमण रोकने के लिए बच्चों को कोविड से अवगत कराएं अभिभावक

बक्सर22 दिन पहले
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  • अपनी ओर से न होने दें लापरवाही, संक्रमण के लक्षण दिखने पर तत्काल कराएं जांच, मास्क लगाकर घर से बाहर निकलें बच्चे, समूह बनाकर खाने और खेलने से करें परहेज

राज्य सरकार ने जिला समेत पूरे राज्य में सरकारी व निजी विद्यालयों के हायर क्लासेज को 50-50 प्रतिशत के साथ खोलने का निर्देश जारी किया है। जिसके बाद सभी स्कूल तय समय में कक्षाओं के संचालन करने की तैयारी में लगे हुए हैं। ताकि, बच्चों को बिना किसी परेशानी व संक्रमण के संभावित खतरे से बचाया जा सके। हालांकि जिले में संक्रमण की रफ्तार अभी काफी कम है, लेकिन संक्रमण की संभावना अब भी है। जिससे बच्चों व किशोरों को बचाने की जिम्मेदारी भी उनकी है। इसके लिए स्कूल प्रबंधन को व्यापक तैयारी तो करनी ही होगी। साथ ही, बच्चों को मास्क के प्रयोग, शारीरिक दूरी का पालन, समय समय पर साबुन से हाथ धोने और हैंड सैनिटाइजर के प्रयोग के लिए भी प्रेरित करना होगा।

बच्चों की समझ विकसित करने के लिए देनी होगी जानकारी
डीपीएम सन्तोष कुमार ने बताया, जब तक बच्चों के लिए टीका नहीं आ जाता, तब तक बच्चों की निगरानी ठीक से करनी होगी। अब तो स्कूल भी खुलने लगे हैं, ऐसे में निगरानी के साथ कोरोना संक्रमण से बचाव के तरीकों व अन्य प्रोटोकॉल की भी जानकारी उन्हें देनी होगी। संक्रमण काल में स्कूल खुलने की स्थिति में प्रबंधन की जिम्मेदारी अधिक बढ़ जाएगी। बस, स्कूल परिसर व कक्षाओं में बच्चे को संक्रमण से बचाया जा सके, इसके लिए सभी तैयारी कर लेनी होगी। बस, स्कूली वाहनों कक्षाओं में शारीरिक दूरी का पालन करते हुए बैठाएं, बच्चों को आधी छुट्टी के दौरान कक्षा से बाहर ना जाने दिया जाए और लंच भी क्लास रूम में होना चाहिए। ऐसी गतिविधि या कार्यक्रम का आयोजन न करें, जिससे शारीरिक दूरी के प्रोटोकॉल का उल्लंघन हो।

कोरोना का प्रकोप : लक्षण दिखने पर तत्काल कराएं जांच

डीपीएम ने बताया, संक्रमण से बचने के लिए सभी प्रोटोकॉल का पालन तो कराना ही होगा। साथ ही, उनमें यदि कोरोना संक्रमण के कोई लक्षण दिखे तो अभिभावक और स्कूल प्रबंधन उसे अनदेखा न करें। यदि, किसी बच्चे में खांसी-जुकाम, बुखार आदि लक्षण दिखे, तो शिक्षक तुरंत उस बच्चे को अन्य बच्चों से अलग करते हुए उस बच्चे को उसके घर पहुंचाना होगा। अभिभावकों को बताएंगे कि वह उस बच्चे तथा परिवार वालों के तुरंत कोरोना के टेस्ट करवाएं और इस बारे स्कूल प्रबंधक स्वास्थ्य विभाग को भी सूचित करें। जिससे लक्षण की पहचान की जा सके और रिपोर्ट पॉजिटिव आने की स्थिति में उनका जल्द इलाज शुरू किया जा सके। लक्षण दिखने पर अनदेखी करने की गलती न करें। कोरोना को लेकर लापरवाही पड़ सकती है भारी। कोरोना टीका जरुर लगवाए।

संक्रमण से बचाये रखना अभिभाकों के लिए चुनौती

कोरोना वायरस संक्रमण के मामले आना कम ज़रूर हुए हैं, लेकिन पूरी तरह ख़त्म नहीं हुए हैं। बच्चे अब तक घर के सुरक्षित माहौल में थे, लेकिन अब उन्हें अन्य बच्चों के बीच भेजना और उन्हें संक्रमण से बचाए रखना अभिभावकों के लिए बड़ी चुनौती है। जिसकी चिंता के कारण वह अपने बच्चों को स्कूल भेजने में कतरा रहे हैं। जिला मुख्यालय स्थित स्टेशन रोड निवासी द्वारिका पांडेय के बच्चे शहर के निजी विद्यालय में पढ़ते हैं। उनकी बेटी स्कूल जाने की ज़िद पर अड़ी है। द्वारिका पांडेय कहते हैं, :इतने महीनों तक बच्चे घर पर थे।

अब उन्हें स्कूल भेजने में डर लगता है। स्कूल में बच्चों को एकदूसरे से दूर बिठाया जाता है लेकिन बच्चे तो दोस्तों में घुलमिल जाते ही हैं। इसलिए मैंने अपनी बेटी को समझा रहा हूं कि वह दूसरों के ग्रुप बनाकर साथ खाना-पीना नहीं है। केवल घर से लिया लंच ही खाना है। साथ ही, क्लास में दूसरों बच्चों से दो गज की दूरी बनाकर ही बैठे।’

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