लापरवाही:मुक्तिधाम पर गंदगी व शवों की कतार के बीच दाह संस्कार कर रहे हैं लोग

बक्सर6 महीने पहले
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घाट पर दाहसंस्कार करते हुए - Dainik Bhaskar
घाट पर दाहसंस्कार करते हुए
  • कोरोना से हुई मौत का गवाह बना बक्सर का मुक्तिधाम, पहले पहुंच रही थी औसतन 40 शव, अब पांच दिनों से बढ़ी है संख्या, दिन के 10 बजे 20 से अधिक शव जलाये गए

सुबह के 10 बज रहे थे। गर्मी की तपिश व पसीने से तरबतर हुए परिजन शव के साथ बक्सर के मुक्तिधाम यानी श्मशान घाट पर पहुंच रहे थे। देखते ही देखते आधे घण्टे के अंदर 10 लाशें पहुंच गई। घाट पर गंदगी का आलम व लाशों की लगी कतार से परिजन घाट पर जमीन तलाश रहे थे, जहां वे अपने साथ लाए शव का दाहसंस्कार कर सकें। अचानक लाशों की बढ़ती संख्या ने सबको सोंचने को विवश कर दिया। लोग इस बात की ज्यादा चर्चा मौत के कारण को लेकर कर रहे थे। चेहरे पर उदासी और अपनों के खोने का गम लिए परिजन व फक्कड़ व खुद से सफाई कर शव के लिए लड़कियां व गोइठा सजा रहे थे। इसकी बीच बक्सर एसडीओ के के उपाध्याय को घाट पर पसरी गंदगियां के बारे में जानकारी हुई। जिसके बाद वहां नगर परिषद कर्मी जेसीबी लेकर पहुंचे और सफाई करवाई। जिसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली। इसके बाद लाशों के जलने की सिलसिला जारी हो गया। कोरोना जैसी महामारी की चर्चा करते हुए लोग एक दूसरे के बीच इस बात की भी चर्चा कर रहे थे कि ज्यादातर मौतें ऑक्सीजन की लेवल कम होने के कारण ही हो रही है। इसको लेकर लोग सरकार, स्वास्थ्य विभाग आदि की व्यवस्था को लेकर जमकर कोसते नजर आए। घाटों पर शेड की कमी,पेजयल की समस्या आदि पर तथाकथित जनप्रतिनिधियों को भी कोसने में कोई कसर नही छोड़ा। ऐसे में दिन के डेढ़ बजे तक क्रमश 20 से अधिक लाशें जल चुकी थी। हालांकि इसके पहले यानी 10 बजे के पहले करीब 10 लाशें जल चुकी थी। इसी घाट पर अलग से कोविड से मरे लोगों की दाहसंस्कार करने की व्यवस्था की गई है। जहां दो बजे तक पांच से अधिक लाशों को एम्बुलेंस लेकर पहुंची। वैसे मृतकों की संख्या सब एक ही में जोडकर 2 बजे तक लाशों के जलने की कुल संख्या 33 रही। इस तरह चरमराई व्यवस्था के बीच मुक्तिधाम पर सामान्य व कोविड से मृत शवों का दाहसंस्कार करने को आए परिजन मजबूर दिखे। क्योंकि कोविड मृत के लिए बनाए गए शवदाह गृह के बाहर लोग किस कदर खड़े रहने को मजबूर रहे यह वहां की व्यवस्था बताने के लिए काफी है। कई ट्रिप एम्बुलेंस से पहुंची लाशें यह बताने को काफी रही कि कोरोना ने जिले को किस तरह से झकझोर रखा है। यहां लोगों को शव जलवाने से अधिक खुद के चेहरे पर मौत के मंजर का खौफ साफ दिख रहा था। कुछेक लोग ऐसे दिखे जिनके चेहरे पर मास्क तक नही था। खासकर घाट पर सेवा दे रहे कई लोग भी मास्क से इस कदर बेखबर दिखे मानो जिले में कोरोना का भय ही ना हो। इस दौरान इस बात की भी ज्यादा चर्चा रही कि कई लोगों की मौतें हार्ट अटैक आदि के कारण भी हो रही है। तेज धूप की वजह से लोगों का मुंह सूखने लग रहा है। ऐसे में यहां पानी की डिमांड कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है। क्योंकि घाट के पास महज एक या दो ही चापाकल है। जहां प्यास बुझाने के लिए लोगों को मशक्कत करनी पड़ रही है। वही कोरोना का भय भी चापाकल पर दिख रही है। ऐसे में लोग खुद बचाव करने को लेकर डिब्बा बन्द पानी खरीद रहे हैं। जिसके कारण पानी बोतल की बिक्री की मांग बढ़ रही है।

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