समाज से अपेक्षा:सरस्वती पुस्तकालय के उद्धार के लिए करें सहयोग

बक्सर9 महीने पहले
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जिले का एकमात्र प्राचीन एवं ऐतिहासिक पुस्तकालय ‘सरस्वती पुस्तकालय’ है जो अपनी उपेक्षा बदइंतजामी तथा संचालकों की सम्यक संचालन व इच्छाशक्ति की कमी के कारण अपनी दुर्दशा पर आँसू बहाने पर मजबूर है।

जिले के वरिष्ठ नेता एवं भोजपुरी साहित्य मण्डल के अध्यक्ष अनिल कुमार त्रिवेदी ने पुस्तकालय की दिन दशा में गुणात्मक सुधार के लिए प्रशासन सहित स्थानीय सांसद एवं मंत्री अश्विनी चौबे, विधायक संजय कुमार तिवारी, विश्वनाथ राम से बढ़कर सहयोग के लिए आगे बढ़कर एकजुटता दिखाने की अपील की है। जिससे यह पुस्तकालय पुनः अपनी पुरानी गरिमा को प्राप्त कर सके। एक जमाना था जब यह सरस्वती पुस्तकालय के साहित्यिक सांस्कृतिक गतिविधियों का केन्द्र विन्दु हुआ करता था।

भोजपुरी की पहली पत्रिका का प्रकाशन बक्सर भी धरती से 1915 ई. में ‘बगसर समाचार’ के नाम से शुरू हुआ। जो 1918 ई. तक निकलता रहा। साहित्यकार डॉ० अरुण मोहन भारवि के प्रकाशित एक निबंध के अनुसार ‘बगसर समचार’ पहले हस्तलिखित फिर पाक्षिक और बाद में काशिका प्रेस वाराणसी से मुद्रित होकर त्रैमासिक रूप में निकली। इसके सम्पादक जयप्रकाश लाल तथा प्रकाशक के रूप में सरस्वती पुस्तकालय का नाम छपता था।

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