खेतीबाड़ी / धान की नर्सरी की तैयारी शुरू, श्रीविधि से 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक की पैदावार

Preparation of paddy nursery, yield up to 50 quintals per hectare from Sridhivi
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Preparation of paddy nursery, yield up to 50 quintals per hectare from Sridhivi

  • किसानों ने शुरू की नर्सरी लगाने की तैयारी, लक्ष्य मिलते ही विभाग भी करेगा मॉनिटरिंग

दैनिक भास्कर

May 30, 2020, 05:00 AM IST

बक्सर. लॉकडाउन के कारण इस बार गेहूं की कटाई में देरी हुई है, लेकिन इस वजह से अब कृषि विभाग धान व खरीफ फसलों की बुआई में देरी नहीं करना चाहता है। जिले में किसान अब धान की नर्सरी तैयार करने में जुट गये हैं। किसानों ने इसके लिए खेतों की जुताई भी शुरू कर दी है, लेकिन विभाग को अब तक धान व अन्य खरीफ फसलों की बुआई का लक्ष्य प्राप्त नहीं हुआ है। जिसके कारण विभाग अब तक प्रखण्डों को लक्ष्य का आवंटन नहीं कर सका है। लेकिन, विभाग ने पूरी तैयरी कर रखी है।

जैसे ही जिले में खरीफ फसलों बुआई का लक्ष्य मिल जाएगा। वैसे ही, प्रखंडों में लक्ष्य का वितरण कर इसकी मॉनिटरिंग शुरू कर दी जाएगी। कृषि विभाग के सूत्रों की मानें तो वर्ष 2018-19 में पूरे जिले में नब्बे हजार हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य प्राप्त हुआ था। जो इस बार भी निर्धारित रहने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, इस वर्ष के विशेष अभियान में श्री विधि से धान की खेती पर विभाग अधिक जोर दे दिया जाएगा।

विभागीय की मानें तो श्री विधि से धान की खेती करने से 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त की जा सकती है। इसके अलावा किसानों को अच्छी प्रजाति की उपजशील धान की खेती के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। ताकि जिले में वर्तमान वित्तीय वर्ष में रिकार्ड धान का उत्पादन हो सके। कृषि विभाग ने इसके लिए किसानों को बकायदा प्रशिक्षित करने की भी तैयारियां की है। ताकि बेहतर तरीके से प्रशिक्षण प्राप्त कर किसान उन्नत खेती कर सकें।
खेती की तैयारी में उचित लाइन का प्रयोग: खेती की तैयारी परंपरागत तरीके से की जाती है, केवल इतना ध्यान रखा जाता है कि ज़मीन समतल हो। पौध रोपण के 12 से 24 घंटे पूर्व खेत की तैयारी करके एक से तीन सेमी से ज्यादा पानी खेत में नहीं रखा जाता है। पौधा रोपण से पहले खेत में 10 गुणा 10 इंच की दूरी पर निशान लगाया जाता है। पौधे के बीच उचित लाइन बना ली जाती है। इससे निशान बनाने में आसानी होती है। निशान लगाने का काम पौधा रोपण से छह घंटे पूर्व किया जाता है।
वैज्ञानिकों ने दिया हरी खाद के प्रयोग पर जोर
कृषि विभाग के अधिकारी व कृषि वैज्ञानिक किसानों को धान के अच्छे उत्पादन के लिए हरी खाद का प्रयोग अधिक से अधिक मात्र में करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए किसान सलाहकारों व कृषि समन्वयकों की मदद ली जा रही है। वहीं, कृषि विभाग किसानों को धान की फसल लगाने के पूर्व ढैंचा व मूंग की खेती करने पर जोर देता रहा है। इसके लिए प्रखंडों में अनुदानित दर पर ढैंचा व मूंग के बीज उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। 
धान की नर्सरी तैयार करने का तरीका
एक एकड़ जमीन के लिए दो किलोग्राम बीज लें। तैरते हुए बीजों को निकाल कर फेंक दें क्योंकि वो खराब हैं। स्वस्थ बीजों से नमक को हटाने के लिए साफ पानी से धोएं। कार्बेन्डाजाईम से बीज को उपचारित करें। जमीन से चार इंच ऊंची नर्सरी तैयार करें, जिसके चारों ओर नाली हो। नर्सरी में गोबर की खाद अथवा केंचुआ खाद डाल कर भुरभुरा बनाएं। नर्सरी की सिंचाई करें। सिंचाई के बाद उनमें बीज का छिड़काव करें। 

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