संकल्प:समागम में लिया गया संकल्प, सभी लोगों की थाली में उपलब्ध होगा बिहारी व्यंजन

बक्सर2 महीने पहले
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कृषक वैज्ञानिक समागम में मौजूद किसान। - Dainik Bhaskar
कृषक वैज्ञानिक समागम में मौजूद किसान।
  • कृषि विज्ञान केंद्र डुमरांव में कृषक-वैज्ञानिक समागम का हुआ आयोजन

जलवायु अनुकूल प्रजातियों, प्रौद्योगिकीयाें एवं कार्य प्रणालियों को जिले के प्रगतिशील किसानों के बीच पहुंचने तथा कृषि जोखिम को कम करने वाले प्रजातियों को बढ़ावा एवं इसके प्रति जागरुकता लाने तथा इसके प्रसार हेतु मंगलवार को कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा एक दिवसीय कृषक-वैज्ञानिक समागम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत जलवायु परिवर्तन से कृषि पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव और इससे उत्पन्न समस्या एवं कुपोषण की चुनौतियों के समाधान हेतु भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा विकसित उच्च पोषक तत्वों से भरपूर 35 फसल किस्मों व राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान, रायपुर के नवनिर्मित परिसर को राष्ट्र को समर्पित करने समेत कई कृषि योजनाओं की शुरुआत करते हुए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री तथा प्रधानमंत्री के संबोधन तथा किसानों से सीधी बातचीत का प्रसारण वर्चुअल कार्यक्रम में किया गया।

उपमुख्य पार्षद ने किया कार्यक्रम का उद्घाटन
केन्द्र द्वारा आयोजित कृषक-वैज्ञानिक समागम कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि इन्द्रप्रताप सिंह, नगर उपाध्यक्ष, जिला कृषि पदाधिकारी, मनोज कुमार, संजय सिंह एवं केन्द्र के प्रभारी प्रमुख हरिगोबिंद ने संयुक्त रूप से द्वीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम के अतिथियों व किसान प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए हरिगोबिंद ने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा विकसित प्रभेद जिसमें चना, अरहर, सोयाबीन, धान, बाजरा, मक्का, कुटू, बाकला, आदि के कुल 35 उन्नतशील पोषणयुक्त बीज विकसित किये गये जो बदलते जलवायु परिवर्तन से बहुत कम प्रभावित होगें तथा इनका कुपोषण को दूर करने मे महत्वपूर्ण योगदान होगा।

जिला कृषि पदाधिकारी, मनोज कुमार ने प्रतिभागियों को राज्य सरकार की संबंधित सभी योजनाओं की जानकारी दी तथा इनका लाभ किसानों को लेने की बात कही। इन्द्रप्रताप सिंह ने कहा कि जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाकर ही अनाज उत्पादन मे आत्मनिर्भर होकर ही ‘हर थाली में एक बिहारी व्यजंन’ के सपने को साकार को किया जा सकता है।

साथ ही उन्होंने किसानों से कृषि विज्ञान केन्द्र के द्वारा दी गई जानकारी व प्रदर्शित तकनीकियों को अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम मे रामोबरिया, बालापुर, चुरामनपुर, हरिकिशुनपुर, दलसागर, जगदीशपुर, हुंकहां, कुकुढ़ा, बिझौरा, आदि गांवों के किसान उपस्थित थे।

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