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आर्थिक रूप से टूट चुके स्कूल संचालक व शिक्षक:निजी स्कूल बंद होने से शिक्षक व कर्मी परेशान, चाय बेचने व ऑटो चलाने को मजबूर

बक्सरएक महीने पहलेलेखक: ​​​​​​​रविशंकर श्रीवास्तव
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  • कमाई ना धमाई भरना है बिजली बिल और वाहनों की ईएमआई, स्कूल भवन का किराया नहींं दे पाने की स्थिति में बंद करने को विवश हुए संचालक, बेरोजगार हुए शिक्षक अब रोजगार ढूंढने को मजबूर

कोरोना काल में बंद हुए निजी स्कूल से न केवल बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है बल्कि स्कूल संचालक व कार्यरत शिक्षक व कर्मियों का हाल बेहाल कर दिया है। पिछले डेढ़ साल से किसी तरह घर परिवार का पालन-पोषण करने वाले शिक्षक इस उम्मीद में बैठे थे कि शायद उन्हें इस साल पढ़ाने का मौका मिले। किन्तु कोरोना की लहर ने उनके उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

ऐसे में आर्थिक रूप से टूट चुके स्कूल संचालक व शिक्षक ऐसे मोड़ पर खड़े हो गए हैं। जहां वे समझ नहीं पा रहे हैं कि आगे की जिंदगी कैसे चलेगी। स्कूल संचालक स्कूल भवन का किराया, बिजली बिल व खरीदे गए गाड़ी का ईएमआई जमा नहींं कर पा रहे हैं। निजी विद्यालय में पढ़ाने वाले शिक्षक पेट और परिवार के लिए चाय बेचने व ऑटो चलाने तक को विवश है।

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से एमए करने वाले निजी स्कूल के शिक्षक वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता ब्रह्मपुर में चाय बेच रहे हैं। वे कहते हैं कि स्कूल बंद होने के बाद आर्थिक संकट आ पड़ी है। वहीं ज्ञानदीप पब्लिक स्कूल के निदेशक सुभाष गोस्वामी ईएमआई भरने को लेकर ऑटो चला रहे है। कोचिंग संचालक अमित कुमार ने किराना स्टोर खोल दिया है। पुराना भोजपुर स्थित एसआर पब्लिक स्कूल के संचालक वीरेन्द्र मिश्रा ने बताया कि बिजली का सामान बेचने का काम शुरू किया है। जिले में कुल 350 निजी स्कूल है। जिसमें 30 से 35 स्कूलों को किराया आदि नहींं होने से बंद कर दिया गया।

ईएमआई नहींं भरे तो जब्त हो गयी गाड़ी, स्कूल की बस बेचकर परिवार पालने को हुए मजबूर

डुमराव के मठीला स्थित होली मिशन पब्लिक स्कूल के संचालक विनोद चौधरी कहते हैं कि ईएमआई नहीं चुकाने पर फाइनांस कम्पनी ने दो गाड़ी जब्त कर ली। जासो रोड स्थित द रिगल पब्लिक स्कूल के संचालक गणेश पाठक बताते हैं कि बिजली कंपनी से रोज-रोज बिल जमा करने के लिए फोन आता है। अब समझ में नहींं आता है कि क्या किया जाए।

स्कूल बंद कर फैक्ट्री में काम ढूंढ़ रहा हूं। वही बक्सर सिविल लाइंस स्थित ईगल हाइट्स पब्लिक स्कूल की संचालिका प्रियंका कहती हैं कि गाड़ी की ईएमआई नहींं दे पाने के कारण उसे बेचने की तैयारी की जा रही है। इसके साथ ही अब स्कूल भवन में दुकान खोलने का विचार बन रहा है। बक्सर के नेहरू नगर स्थित डॉन बॉस्को स्कूल के संचालक जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव कहते हैं कि किराया के बोझ तले इस कदर डूब चुका हूं कि सब्जी व फल बेचने को सोच रहा हूं।

सरकार और प्रशासन से आर्थिक सहयोग की उम्मीद : जिलाध्यक्ष
ऑल इंडिया पब्लिक स्कूल एन्ड चिल्ड्रन वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष वैदेही श्रीवास्तव कहते हैं कि स्कूल बंद होने से जहां बच्चों की पढ़ाई व रूटीन प्रभावित हुई है। वही संचालकों व शिक्षकों व कर्मियों के समक्ष तंगहाली उत्पन्न हो गई है। सरकार ने जुलाई में विद्यालय संचालन के लिए आश्वासन दिया परन्तु और अच्छा तो तब होता जब दो वर्षों की क्षतिपूर्ति, बिजली बिल, भवन टैक्स, गैर शैक्षणिक कर्मचारीयों का भुगतान,गाड़ीयों का ई एम आई अथवा बिल्डिंग लोन में कुछ ब्याज में छूट या सरकार व प्रशासन की ओर से कोई आर्थिक सहयोग भी मिलता।

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