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ब्रह्मेश्वर नाथ मन्दिर बना भक्तों के आस्था का केंद्र:कोरोना काल के लुढ़कते ग्राफ के बीच भक्तों के उत्साह ने बनाया ब्रह्मेश्वर नाथ प्रांगण को भक्तिमय

बक्सर9 दिन पहले
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मार्च 2020 से कोरोना महामारी के मद्देनजर, ब्रह्मपुर शिव मन्दिर में भक्तों का प्रवेश वर्जित था। लेकिन बिहार सरकार द्वारा अनलॉक घोषित होने के बाद से भक्त गण फिर से बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ के दर्शन और पूजन कर रहे हैं। इस पंचायत चुनावी सीजन में प्रत्याशी अपने अपने किस्मत को आजमाने और बाबा का आशीर्वाद लेने बाबा के चौखट पर सिर नवा रहे है।

पौराणिक मान्यताओं के आधार पर ब्रह्मा जी द्वारा स्थापित अति प्राचीन शिवलिंग ‘बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ जी’ की चर्चित दर्शनीय तीर्थ स्थली हैं। भगवान शंकर के प्रधान तीर्थ स्थलों में इनकी गणना अनेक पुराणों में मिलता है। शिव महापुराण की रुद्र संहिता में यह वर्णित हैं कि महादेव धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाले हैं। इन्हें मनोकामना महादेव भी कहा जाता है।

मंदिर का मुख्य दरवाजा पश्चिम मुखी है। जबकि देश के अन्य शिव मंदिरों का दरवाजा पूरब में है। पुजारी धर्मेंद्र पाण्डेय कहते हैं बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ जी का यह ‘मनोकामना लिंग है’। भगवान शिव ने माता पार्वती के साथ जिस अवधि में विवाह किया, उसी काल में इनकी स्थापना हुई।

यहां जलाभिषेक का महत्व सालों भर है लेकिन सावन में कांवरियों का जलाभिषेक का विशेष महत्व है। शारदीय नवरात्रि के प्रारंभ से ही क्षेत्र का माहौल भक्तिमय हो गया है। वहीं व्यावसाइयों में भी खुशी की लहर देखने को मिली।

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