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फाइलेरिया उन्मूलन:एमडीए अभियान में शहरी आंगनबाड़ी केंद्रों की सेविकाओं की भूमिका अहम

बक्सर4 दिन पहले
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कार्यक्रम में शामिल आंगनबाड़ी सेविकाएं। - Dainik Bhaskar
कार्यक्रम में शामिल आंगनबाड़ी सेविकाएं।
  • दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं को दवा नहीं खिलाई जाएगी
  • केयर बीएम व बीसीएम ने सेविकाओं को एमडीए की दी पूरी जानकारी

जिले में 20 सितंबर से शुरू होने वाले फाइलेरिया उन्मूलन अभियान की तैयारियां जोरों पर है। इसके लिए प्रखंडस्तर से लेकर जिलास्तर पर प्रशिक्षण आदि का काम चल रहा है। इसी क्रम में बीते दिन सदर प्रखंड में शहरी क्षेत्र में स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों की सेविकाओं को भी प्रशिक्षित किया गया।

जिसमें उन्हें अभियान की बारीकियों व दवाओं के खिलाने के संबंध में पूरी जानकारी दी गई। साथ ही, मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) अभियान के तहत लाभुकों को डीईसी व अल्बेंडाजोल की गोली खिलाने के साथ साथ फाइलेरिया से बचाव के लिए लोगों को दी जाने वाली जानकारी से अवगत कराया गया।

इस दौरान अलग-अलग उम्र के लोगों को दवा खिलाने के नियमों की जानकारी दी गई। केयर इंडिया के बीएम आलोक कुमार और सदर प्रखंड के बीसीएम प्रिंस कुमार मौजूद थे। बताया गया कि 02 वर्ष से 05 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी व एलबेंडाजोल की एक-एक गोली खिलाई जाएगी।

जबकि 06 से 14 वर्ष के बच्चों को डीईसी के दो व एलबेंडाजोल की एक गोली खिलाई जाएगी। 15 वर्ष से अधिक उम्र के लोंगो को डीईसी की तीन व एलबेंडाजोल की एक गोली खिलाई जाएगी। दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों व गर्भवती महिलाओं को दवा नहीं खिलाई जाती है।

उम्र के हिसाब से लाभुकों को दवा खिलानी है
बीसीएम प्रिंस कुमार सिंह ने सेविकाओं को बताया, लाभुकों को दवा खिलाने में काफी सावधानी बरतनी है। अभियान के दौरान लोगों को अपने सामने ही डीईसी व अल्बेंडाजोल की गोली खिलाई जाएगी। उम्र के हिसाब से उनको दवा अपने समक्ष खिलानी है।

दो से पांच वर्ष के बच्चों को डीईसी और अल्बेंडाजोल की एक गोली, छह से 14 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी की दो और अल्बेंडाजोल की एक गोली और 15 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को डीईसी की तीन और अल्बेंडाजोल की एक गोली खिलाई जाएगी।

अल्बेंडाजोल की गोली लोगों को चबाकर खाना है। दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं व गंभीर रूप से बीमार लोगों को भी दवा नहीं खिलाई जाएगी।

शहरी व गांव के लोगों को किया जा रहा जागरूक
केयर बीएम आलोक कुमार ने बताया, शहरी इलाकों में फाइलेरिया अभियान में शहरी इलाकों की आंगनबाड़ी सेविकाओं की भूमिका अहम है। साथ ही, स्वास्थ्य समिति के निर्देशानुसार यह अभियान पूरे 14 दिनों तक चलेगा। इस दौरान अपने सामने क्षेत्र में लोगों को दवा खिलाना है।

दवा खिलाने के बाद रजिस्टर में लाभुकों का नाम भी दर्ज होगा। दूसरी ओर, अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग को केयर इंडिया और पीसीआई सहयोग भी करेगा। अभियान की सफलता को लेकर प्रखंडों में भी आशा फैसिलिटेटर व कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

साथ ही, आशा कार्यकर्ता और पीसीआई के सदस्य शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को जागरूक भी कर रहे हैं। ताकि, अभियान की जानकारी जन-जन तक पहुंच सके और उसकी सफलता में लोग अपना योगदान दे सकें।

किसी को खाली पेट नहीं खानी है दवा
सेविकाओं को बताया गया कि फाइलेरिया क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होने वाला एक संक्रामक रोग है। यह मच्छर घरों के दूषित स्थलों, छतों पर लगे पानी में भी पाया जाता है। शुरूआती लक्षण में बुखार का आना, शरीर में लाल धब्बे या दाग होना, सुजन होना है।

व्यक्ति किसी भी उम्र में फाइलेरिया से संक्रमित हो सकता है। फाइलेरिया के लक्षण हाथ और पैर की सूजन, हाथी पांव, हाइड्रोसील का सूजन है। फाइलेरिया की रोकथाम नियंत्रण के लिए डीईसी एवम अल्बेंडाजोल की गोली साल में एक बार सरकार द्वारा मुफ्त में खिलाई जाती है। यह दवा खाली पेट नहीं खाना चाहिए।

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