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कोरोना इफेक्ट:श्रावणी मेला में किसी भी मंदिर में नहीं कर सकेंगे पहले की तरह जलाभिषेक, सभी घाट भी रहेंगे बंद

बक्सरएक महीने पहले
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  • कोरोनावायरस के बढ़ते मामलों को लेकर जिला प्रशासन ने लिया ऐतिहासिक फैसला
  • जिले की मंदिर समिति के सदस्यों के साथ हुई बैठक के दौरान सर्वसम्मति से एसडीओ ने लिया निर्णय

श्रावणी मेला को लेकर गुरुवार की देर रात मंदिर समिति के साथ सदर एसडीओ केके उपाध्याय के द्वारा एक बैठक की गई। जिसमें श्रावणी मेला के दौरान अनुमंडल क्षेत्र के सभी मंदिरों में होने वाले जलाभिषेक को लेकर चर्चा की गई। इस दौरान सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि शहर के सभी मंदिर समेत अन्य क्षेत्रीय मंदिर में पहले जैसा जलाभिषेक का कार्यक्रम आयोजित होगा। इस दौरान शहर के सभी प्रबंधन समितियों के लोग मौजूद रहे।

उसमें सबकी सहमति से निर्णय लिया गया कि इस श्रावणी मेला के दौरान किसी भी मंदिर में जलाभिषेक का पूर्व की भांति कोई कार्यक्रम नहीं होगा। जिले के या जिले के बाहर के विभिन्न स्थानों से आए हुए श्रद्धालुओं को भी यह संदेश देने का संकल्प लिया गया। ताकि वे रामरेखा घाट, नाथ बाबा घाट, सिद्धनाथ घाट, गोलाघाट या अन्य किसी गंगा घाट पर जलाभिषेक के लिए जल भरने की तैयारी करके शहर में नहीं आएं। 

सोशल डिस्टेंसिंग का करना ही होगा पालन: सभी मंदिर प्रबंधन समितियों को सरकार के निर्देश से फिर से अवगत कराया गया है। सब से अनुरोध किया गया कि वे अपने यहां सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों का ठीक से पालन करें व कराएं। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को इस बात के लिए प्रेरित करें कि वे मास्क लगाएं और सैनिटाइजेशन के अन्य उपायों पर अमल करें। सभी मंदिर की संचालन समितियों के उपस्थित सदस्यों ने इस पर सहमति जताई और यह निश्चय किया कि मंदिरों में सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन किया जाएगा।
समिति करेगी घरों में व्रत का अनुरोध
बैठक के दौरान सभी समिति के सदस्यों ने कहा कि यदि मंदिर में श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए आते हैं। तो उन से विनती की जाएगी। ताकि वे अपने घरों में सावन के सोमवार के व्रत को कर सकें। मंदिर में सामाजिक दुरी पूर्व की तरह बरकरार रह सके। साथ में वे ये भी अनुरोध करेंगे कि इसके लिए मंदिरों में अनावश्यक भीड़ नहीं लगाएं। जिससे भगवान शिव के राज भोग में कोई बाधा उत्पन्न न हो सके।
तैनात होंगे पुलिस पदाधिकारी के साथ दण्डाधिकारी
पिछले प्रत्येक धार्मिक आयोजनों के वक्त लाख मना व सख्ती के बाद भी लोग गंगा घाटों पर आते जाते रहे हैं।इन्ही सब बातों को ध्यान में रखते हुए पूर्व से तैयारी शुरु की गयी है। ताकि श्रावणी मेला को लेकर भीड़-भाड़ को रोकने के लिए शहर के सभी शिवालयों, घाटों व शहर के बाहर विभिन्न स्थानों पर दंडाधिकारी तथा पुलिस बलों की तैनाती की जा सके। एसडीओ ने बैठक के दौरान मंदिर समितियों की सुझाव को ध्यान में रखते हुए हर वैसे जगहों को चिह्नित करने की बात कही जहां पुलिस पदाधिकारी प्रतिनियुक्त किए जाएंगे।

जलपात्र से ज्यादा जरूरी हाथों का सैनिटाइज होना: कृष्ण कुमार उपाध्याय के द्वारा जारी आदेश में लोगों से यह अपील किया गया है कि जलपात्र के साथ स्वयं का हाथ शुद्ध होने की ज्यादा जरुरी है। उन्होने मंदिर समिति से कहा कि यह व्यवस्था होनी चाहिये कि परिसर के अंदर लगने वाले माला व प्रसाद के दुकान पर ज्यादा भीड़ भड़का ना हो। वहीं मंदिर में प्रवेश से पहले हाथों को सैनिटाइज करना जरुरी है। जबकि मूर्तियों को छूने के लिये सख्त मनाही किया गया है। 
बसांव मठ पर नहीं होगा गुरुपूर्णिमा महोत्सव: नगर के कोइरपुरवा स्थित बसांव मठ के महंत श्रीअच्युतपरपन्नाचार्य जी महाराज ने प्रेस बयान जारी कर कहा कि इस वर्ष मठ पर गुरु पूर्णिमा महोत्सव नहीं मनाया जायेगा। विदित हो कि इस वर्ष गुरुपूर्णिमा महोत्सव 5 जुलाई को पड़ रहा है। उनके द्वारा आगे कहा गया कि देश में कोरोना बीमारी के कहर से सारा देश पीड़ित है। प्रसाशन द्वारा सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन सबको मिलकर करना है। तभी देश व समाज की रक्षा सम्भव है।

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