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भगवान श्रीकृष्ण का बरही महोत्सव मनाया गया:जन्म के 11वें दिन प्रभु के नामकरण की परंपरा, चरपोखरी में श्रद्धा से मनाया गया कार्यक्रम

चरपोखरी13 दिन पहले
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सोनवर्षा गांव में प्राचीन भगवान श्रीलक्ष्मी नारायण मंदिर के प्रांगण में संस्कार प्रवाहक संत शिरोमणि १००८ स्वामी श्री रंगनाथाचार्य जी महाराज के तत्वावधान में कृष्ण जन्म के बारहवें दिन भगवान श्रीकृष्ण के बरही महोत्सव मनाया गया। सभी भक्त भगवान के 64 गुणों व छ: रसों में रमें रहे। महाराज जी अपनी कथाओं के माध्यम से बोले कि 11 में दिन भगवान के नामकरण की विधा की गई।

क्योंकि स्मृतियों में ११ वें दिन नामकरण संस्कार का विधान किया गया है। जो पिता अपने पुत्र या पुत्री के जन्म के ११ वें दिन भगवान के नाम से उसका नाम रख देता है, उसके संतान के भविष्य उज्जवल हो जाता है। महाभारत के कथा का उल्लेख करते हुए संत ने उपदेश ने कहा कि अपराजेय योद्धा द्रोणाचार्य के प्रति स्नेह रखते हुए भी धर्म के लिए युद्ध परिदृश्य को देखकर उन्हें छल शक्ति का प्रयोग करना पड़ा।

भगवान श्री कृष्ण बाल काल से ही अपनी योग शक्ति से आसुरी शक्ति को नष्ट करने लगे और भक्तों को बिना फल के जिज्ञासा के ही कर्मों में लगे रहने के लिए प्रेरणा दे गए। इस कार्यक्रम में महोत्सव मीडिया प्रबंधक चंदन कुमार, गोविंद, कुंदन कुमार समेत कुरमरी, सिकरहटा, चंदा, फतेहपुर, मानसागर, दारीडीह, इटौर, मझिआंव समेत दर्जनों गांव के सैकड़ों लोग उपस्थित थे। इस अवसर पर आए हुए सभी अतिथियों का आभार व्यक्त महाराज रंगनाथाचार्य जी ने किया।

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