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फर्जीवाड़ा:रिविलगंज नगर पंचायत की 100 बीघा जमीन बेची, अबतक 450 से अधिक की हुई रजिस्ट्री

छपरा6 दिन पहले
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  • भू-माफिया ने 120 करोड़ की जमीन बेची, सीओ तक को नहीं चला पता, 6 वर्षों से चल रहा था खरीद-बिक्री का खेल

रिविलगंज नगर पंचायत की सरकारी जमीन को ही भू माफिया ने बेच डाली है। एक दो बीघे नहीं बल्कि 100 बीघे से अधिक जमीन की रजिस्ट्री की गई है। बेची व खरीदी गई जमीन की कीमत करीब 120 करोड़ से अधिक आंंकी जा रही है। फर्जीवाड़े का यह खेल पिछले छह सालों से चल रहा है। अबतक प्रशासन के आला अधिकारियों को मामला संज्ञान तक नहीं आया है।

नीचे से ऊपर तक के अधिकारी को भनक तक नहीं है और जमीन एक के बाद एक रजिस्ट्री होते गई। भू-माफिया और बड़े अधिकारियों की मिलीभगत का भी इससे जुड़ाव मिल रहा है। यहां बता दें कि छपरा रिकार्ड रुम से इसके पहले देश का सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया था।

जिसमें जमीन की मूल दस्तावेज में ही हेराफेरी कर अरबों की जमीन रजिस्ट्री कर दी गई। जिसमें मूल दस्तावेज फाड़कर बाहर से अपने नाम का कागज चस्पा दिया गया था। इस मामले में नगर थाना में तत्कालीन जिलाधिकारी ने 219-2012 कांड में आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया था। सारण में भू-माफिया का कारनामा के कई उदाहरण पहले से है।

चार खाते की 100 बीघे से अधिक जमीन की खरीद-बिक्री की गई

रिविलगंज नगर पंचायत के जमीन की चार खाते है। जिसमें करीब 100 बीघे से अधिक जमीन है। यह जमीन नेशनल हाइवे के पास भी है और बस्ती इलाकों में भी है। इन जमीनों को जालसाजों ने एक-एक कर प्लाट वाइज बेच दी है। मनमाने रकम लेकर जमीन की रजिस्ट्री की गई है। इसमें ढाई लाख रुपए कट्ठा से लेकर आठ व 10 लाख रुपए कट्ठा जमीन की कीमत ली गई है। रजिस्ट्री कार्यालय से भी बिना जांच किये रजिस्ट्री कर दी गई है।

दाखिल-खारिज अंचल पर कैसे हुआ

सरकारी जमीन की दाखिल-खारिज बर्षों से अंचल कार्यालय पर कैसे होते आया है। सबसे बड़ा सवाल है कि क्या इसमें बिना कर्मचारी व अधिकारियों के मिलीभगत से संभव नहीं हुआ होगा? एक बार भी दाखिल-खारिज को न तो पकड़ा गया न ही रोका गया।

अबतक 70 से 80 बीघे जमीन की रजिस्ट्री सामने आई है, दायरा बढ़ भी सकता है

नगर पंचायत की जमीन अभी तक 70 से 80 बीघे रजिस्ट्री करने का मामला सामने आया है। यह जमीन 100 बीघे से अधिक हो सकती है। इसका दायरा बढ़ सकता है। सबसे अचरज की बात है कि यह खेल पिछले छह सालों से होते आ रहा है और किसी को कोई पता तक नहीं है। ऐसे में सरकारी स्तर पर सबसे बड़ा लापरवाही व मिलीभगत का भी खुलासा हो रहा है।

नगर पंचायत की जमीन के चार खाते हैं

नगर पंचायत की जमीन के चार खाते है। पहला खाता संख्या-637,324, समस्तीपुर, 1096 गोदना सेमरिया, 47 अजमेर नाम से है। इस जमाबंदी से अंचल में दाखिल खारिज भी कराया गया है।

दाखिल-खारिज अंचल पर कैसे हुआ

सरकारी जमीन की दाखिल-खारिज बर्षों से अंचल कार्यालय पर कैसे होते आया है। सबसे बड़ा सवाल है कि क्या इसमें बिना कर्मचारी व अधिकारियों के मिलीभगत से संभव नहीं हुआ होगा? एक बार भी दाखिल-खारिज को न तो पकड़ा गया न ही रोका गया।

जमीन रजिस्ट्री की जानकारी नहीं

दाखिल-खारिज और सरकारी जमीन की रजिस्ट्री होने के की जानकरी मुझे नहीं है। यह मामला मेरे संज्ञान में आएगा तो इस पर कार्रवाई करेंगे। इसकी जांच कराई जाएगी। अभी इस मामले में कुछ भी कहना सही नहीं होगा। संगीता कुमारी, सीओ, रिविलगंज

ये दो रजिस्ट्री से हुआ खुलासा

450 से अधिक रजिस्ट्री की गई है

रिविलगंज के चार खाते है। खाता संख्या 1096,सर्वे नंबर-2274 की 10 धूर जमीन सुरेन्द्र ठाकुर,ओमप्रकाश ठाकुर बल्दान- उमाशंकर ठाकुर,साकिन-गोदना के नाम से संजय ठाकुर व राजेश ठाकुर वल्दान- राजेश ठाकुर,गोदना,रिविलगंज के नाम से 2.58 रकम में लिखवाई गई है। यह सरकारी खाते की जमीन है। वहीं दूसरा उसी खाते की जमीन जो अड्डा नंबर एक,रिविलगंज में स्थित है।

स्व. महेन्द्र साह के पुत्र नंदकिशोर साह ने अर्चना कुमारी, पति-प्रदीप कुमार को लिखा है। यह जमीन एनएच से सटे सात धूर है। जिसकी कीमत 4.80 लाख है। उन्होंने रजिस्ट्री में जिक्र किया है कि उसने 2000 ई. में राजनारायण प्रसाद समसुद्दीनपुर से लिखवाया है।

रजिस्ट्री कैसे हुई जांच होगी
इस तरह की जानकारी मेरे संज्ञान में नहीं आया है। सरकारी जमीन की रजिस्ट्री कैसे हुई है? अगर ऐसा मामला है तो गंभीर है। इसमें त्वरित कार्रवाई की जायेगी। डॉ. गगन, एडीएम, सारण

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