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आज से नवरात्र शुरू:कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 11:36 से 12: 24 बजे तक

छपरा8 दिन पहले
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सृष्टि के आरंभ के साथ ही प्रकृति की पूजा के विभिन्न विधान देश व काल के प्रवाह के साथ अनादि आदि काल में किसी न किसी रूप में होता आया है। कहीं सामूहिक कहीं एककी, कहीं भव्यता और कहीं सादगीपूर्ण। लिहाजा, इस बार सादगीपूर्ण उपासना होगी,कोरोना संकट में सामाजिक व व्यक्तिगत दूरी का पालन उत्सव आयोजन की मजबूरी है। बहरहाल, प्रथम शैलपुत्री की आराधना के हुई शारदीय नवरात्रि श्रीगणेशित। अरण्यक संस्कृति का पुरोधा सारण त्रिगुणात्मक शक्ति का केंद्र है। दिघवारा प्रखंड के आमी अंबिका स्थान, गढ़देवी, मढ़ौरा व कालरात्रि, डुमरी बुजुर्ग, सोनपुर का सच्चा दरबार भक्तों के लिए खुला है। इन दो सिद्धपीठों व बिहार की सारण जिला की एक शक्ति पीठ पर यद्यपि अन्य जनपदों व प्रदेशों से श्रद्धालु नहीं आ रहे हैं और न इन आस्था केंद्रों पर दुर्गा सप्तशती का पाठ ही सामूहिक रूप से कर पा रहे हैं ।

सूर्यास्त के पहले तक कर सकते है कलश स्थापना

कब तक रहेगा पूजा-अर्चना के लिए मुहूर्त
आचार्य हरेराम शास्त्री बताते है कि अब मुहूर्त 17 अक्टूबर शनिवार को प्रातः काल से सूर्यास्त के पहले तक घरों में कलश स्थापन कर सकते हैं ,वहीं विशेष कामना के लिए अभिजीत मुहूर्त दिन में 11 बजकर 36 मिनट से 12 बजकर 24 मिनट तक में करें। प्रतिपदा तिथि से ही पाठ प्रारंभ होगा, इस दिन भगवती को केश संस्कार के लिए ,कंघी और दर्पण चढ़ाया जाता है। बिल्वाभिमंत्रण 22 अक्तूबर को शाम में करने का मुहूर्त है। पत्रिका प्रवेश ,नेत्रोंमिलन, पट्ट खुलने का मुहूर्त 23 अक्टूबर दिन शुक्रवार सुबह 4 बजे शुरू कर दिन में 12 बजकर 8 मिनट तक किया जायेगा। 23 अक्टूबर को ही महानिशा पूजा भी होगी, क्योंकि 23 को ही रात्रि में अष्टमी तिथि मिल रही है। महाष्टमी की पूजा 24 अक्टूबर को होगर। इस दिन पूजा और भोग लगाएं। महानवमी 25 अक्टूबर को सुबह से ही मनाया जाएगा।

सामाजिक व व्यक्तिगत दूरी का पालन उत्सव आयोजन की मजबूरी
घोड़े पर सवार होकर आएंगी मां और भैंसे पर सवार होकर जाएंगी
नवरात्र 17 अक्टूबर से शुरू हो रहा है और 26 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ संपन्न होगा। इस बार अश्व अर्थात घोड़े पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा और महिष अर्थात् भैंसे पर सवार होकर जाएंगी। इस बार भगवती दुर्गा का आगमन और गमन दोनों ही विश्व के लिए अच्छा नहीं है।

नहीं बन रहे हैं पंडाल व सांस्कृतिक कार्यक्रम
जिला में इस बार सादगीपूर्ण उपासना का विधान प्रकृति ने स्वयं बना दिया है। मूर्ति स्थापना व अखाड़े की अनुज्ञप्ति में मूर्ति स्थापना की तो छूट है। प्रसाद वितरण लोक संस्कृति में रची बसी सांस्कृतिक कार्यक्रम, नाच, नौटंकी, आर्केस्ट्रा, दुगोला रामायण गायन की अनुमति नहीं हैं।

डीएम ने कहा- कोर्ट का आदेश अभी प्राप्त नहीं
गृह मंत्रालय से जो आदेश प्राप्त हुए है उसके मुताबिक दुर्गापूजा होगा। इसके संदर्भ में सभी अधिकारियों को निर्देश दिये जा चुके है। बड़े मंदिरों में तैनाती भी की गई है। कोर्ट का आदेश अभी प्राप्त नहीं हुआ है।

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