पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

सक्रियता:एशिया प्रसिद्ध इंजीनियरिंग फैक्टरी की 17 एकड़ जमीन पर फिर गहराया विवाद

मढ़ौरा24 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

नगर के बीचोंबीच स्थित वर्षों से विवादित रहे एशिया प्रसिद्ध सारण इंजीनयरिंग की जमीन और बिल्डिंग पर विवाद फिर से गहरा गया है । मुजफ्फरपुर के रवि पोद्दार नामक व्यक्ति ने सारण इंजीयरिंग फैक्ट्री की जमीन और बिल्डिंग पर अपने को भी दावेदार बताया है। रवि पोद्दार ने इससे सम्बंधित एक आवेदन मढ़ौरा के एसडीओ, डीएसपी, सीओ, थाना अध्यक्ष के साथ सारण डीएम को देकर कार्रवाई की मांग की है ।

अपने आवेदन में रवि पोद्दार ने कहा है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट से सारण इंजिनियरिंग कम्पनी लिमिटेड की भूमी और प्लांट निलामी में मित्र मंडल संगठन को मिला था । इस मित्र मंडल संगठन का वह 35 प्रतिशत का हिस्सेदार है । उसके पास प्लाट के सभी जमीन में हिस्सेदारी का सहभागिता करार पत्र है । अपने आवेदन में मित्र मंडल संगठन को निलामी से प्राप्त कुल 17 एकड़ दो डिसमिल जमीन की चर्चा करते हुए उसका विवरण भी दिया है ।

उसने कहा है कि बाद में मित्र मंडल संगठन के द्वारा उसे हिस्सा देने से इंनकार करने पर उसने सब जज प्रथम छपरा न्यायालय में एक हकियत बाद संख्या 625/2019 भी दायर किया है । मामले में न्यायालय द्वारा वर्तमान में यथास्थिति का आदेश भी दिया है । रवि पोद्दार ने जमीन पर जबरन कब्जा व बिक्री के प्रयास की चर्चा करते हुए इस पर रोक की मांग की है।

जमीन पर दलालों की है नजर
सारण इंजिनियरिंग की जमीन को लेकर भूमाफियाओं की सक्रियता एक बार फिर से तेज हो गयी है। बता दे कि सारण इंजीनयरिंग फैक्ट्री के बंद हो जाने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट के द्वारा फैक्ट्री की जमीन और मिल स्क्रैप को 2004 में निलाम किया गया था । निलामी के बाद कारोबारियों ने मिल स्क्रैप को तो जैसे तैसे बेच लेने में कामयाब रहे थे लेकिन जमीन और विल्डिंग को लेकर विवाद हावी होता रहा है।

2004 में लिक्विडेट के बाद पिछले 17 साल से अलग अलग पक्ष के द्वारा जमीन और विल्डिंग को बेचने की साजिश चलती रही है। इधर मिल की जमीन और बिल्डिंग को बेचने को लेकर भूमाफियाओं ने फिर से अपनी सक्रियता दिखानी शुरु कर दी है।

जमीन पर दलालों की है नजर
सारण इंजिनियरिंग की जमीन को लेकर भूमाफियाओं की सक्रियता एक बार फिर से तेज हो गयी है। बता दे कि सारण इंजीनयरिंग फैक्ट्री के बंद हो जाने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट के द्वारा फैक्ट्री की जमीन और मिल स्क्रैप को 2004 में निलाम किया गया था । निलामी के बाद कारोबारियों ने मिल स्क्रैप को तो जैसे तैसे बेच लेने में कामयाब रहे थे लेकिन जमीन और विल्डिंग को लेकर विवाद हावी होता रहा है। 2004 में लिक्विडेट के बाद पिछले 17 साल से अलग अलग पक्ष के द्वारा जमीन और विल्डिंग को बेचने की साजिश चलती रही है। इधर मिल की जमीन और बिल्डिंग को बेचने को लेकर भूमाफियाओं ने फिर से अपनी सक्रियता दिखानी शुरु कर दी है।

दो पक्षों के बीच फंसा है मामला
बंद सारण इंजीनियरिंग का जमीन और बिल्डिंग की निलामी के बाद यह दो पक्षों के बीच विवाद का हिस्सा रहा। मित्रमंडल संगठन के अध्यक्ष कानपूर यूपी के केडी सिंह और मुजफ्फरपुर के रवि पोद्दार के बीच हिस्सा को लेकर मामला उलझता रहा है। साझेदारी करार पत्र के अनुसार रवि पोद्दार 35 प्रतिशत का हिस्सेदार है । जबकि दूसरे पक्ष के द्वारा बिना हिस्सेदारी को अलग किए विक्री का प्रयास किया जा रहा है।

3 एकड़ की पहले हो चुकी है बिक्री
मिल एरिया के कुल जमीन से करीब तीन एकड़ जमीन का पूर्व में ही बिक्री कर लेने की बात बताई जाती है। बेची जा चूकी जमीन पर अधिकांश लोगों अपना कब्जा करके रखा है या फिर वे अपना घर बनवा चूके है। सूत्र बताते है कि मिल का स्क्रैप निलामी में गुंजन ट्रेडिंग कम्पंनी को मिला था। इसके मालिक रहे कानपूर के राजकुमार अग्रवाल ने स्क्रैप के साथ सारण इंजीयरिंग के कई प्लाट की रजिस्ट्री भी कर दी थी।

बताया जाता है कि राजकुमार अग्रवाल के हिस्से में जमीन और विल्डिंग नहीं था लेकिन उसने फर्जीवाड़ा कर लोगों से ठगी की । यही नही राजकुमार अग्रवाल ने कई प्लाट पर रुपयें एडवांस में ले लिए थे और बाद में गायब हो गया था।

खबरें और भी हैं...