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खुलासा:पहले शौचालय योजना की राशि ली, फिर मनरेगा जॉब कार्ड से उठाया लाभ

छपरा3 महीने पहले
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  • मामला रिविलगंज का, एक ही व्यक्ति ने कर्मी की मिलीभगत किया फर्जीवाड़ा

लोहिया स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौचालय निर्माण कराकर अनुदान हड़पने का मामला सामने आया है। दर्जनों ऐसे मामले सामने आया है। जिसमें एक ही नाम के व्यक्ति ने पहले रिविलगंज नगर क्षेत्र से शौचालय योजना की 12 हजार राशि उठाव की और फिर प्रखंड क्षेत्र में मनरेगा के जाॅब कार्ड बनाकर लाभ उठा रहा है। यह मामला अधिकारियों के संज्ञान में आया है।

इस गड़बड़ी में प्रखंड व नगर पंचायत स्तर के अधिकारियों की लापरवाही व मिलीभगत भी सामने आ सकता है। यह मामला जांच का विषय है कि ऐसे कितने लोगों के नाम पर फर्जीवाड़ा किया गया है। नगर पंचायत के लोगों को रिविलगंज प्रखंड के मनरेगा के तहत लाभ दिया गया है। जिले के रिविलगंज के प्रभुनाथ नगर दक्षिणवारी चक्की, बैजूटोला निवासी करीब दर्जनों लोगों को रिविलगंज नगर पंचायत के तहत शौचालय निर्माण का अनुदान की राशि का भी भुगतान किया गया है।

नगर पंचायत से लोहिया स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौचालय का निर्माण कराने वाले प्रति व्यक्ति को करीब 12 हजार रुपए की दर से भुगतान किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि प्रखंड के मनरेगा एवं नगर पंचायत के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के मिली-भगत से एक व्यक्ति को दो क्षेत्र यानी नगर पंचायत एवं प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत मनरेगा का लाभ दिया गया है। इस संबंध में रिविलगंज के प्रभुनाथ नगर, दक्षिणवारी चक्की बैजू टोला निवासी रणविजय सिंह ने डीएम को आवेदन देकर शिकायत की है।

पूरे मामले की जांच कर राशि की वसूली कर दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग
जिले के रिविलगंज नगर पंचायत के निवासी दर्जनों लोग पहले लोहिया स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौचालय निर्माण कराकर नगर कार्यालय से अनुदान राशि उठाया। इसके बाद प्रखंड अंतर्गत मनरेगा के तहत लाभ उठा लिया है। इस संबंध में आवेदक रणविजय सिंह ने कहा है कि रिविलगंज प्रखंड मनरेगा के तहत लाभान्वित लोगांे का नाम प्रखंड क्षेत्र के मतदाता सूची दर्ज नहीं है। जबकि वे सभी नगर पंचायत निवासी है, फिर भी उनको प्रखंड के मनरेगा के तहत राशि भुगतान किया गया है। उन्होंने पूरे मामले की जांच कर राशि की वसूली करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग डीएम से की है।

5.16 लाख मनरेगा मजदूर 1.45 लाख करते है रेगुलर

जिले में मनरेगा के तहत करीब 5 लाख 16 हजार जॉब कार्डधारी मजदूर है। जिनमें महज एक लाख 45 हजार मजदूर ही रेगुलर यानि नियमित काम करते है। बाकी लोगों ने जॉब कार्ड तो बना लिया लेकिन आज तक कार्य हीं नहीं किया और न हीं किसी पदाधिकारी से काम की मांग किया है। ऐसे में इन जॉब कार्ड की वास्तविकता की गहन जांच की गई तो बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आ सकता है।

विभाग आकड़ों की माने तो जिले में करीब 3 लाख 91 हजार लोगों ने जॉब कार्ड तो बना लिया, लेकिन आज तक एक भी दिन काम नहीं किया है। ऐसे में मनरेगा पदाधिकारी इन मजदूरों का जॉब कार्ड को रद्द करने को लेकर आवश्यक कार्रवाई भी नहीं किया है। जिससे मनरेगा के कार्यशैली पर आम से लेकर खास लोगों में सवाल उठने लगा है।

सूत्रों की माने तो करीब पांच वर्ष पूर्व जब जॉब कार्ड बनाया जा रहा था उस समय बिना जांच किये ही कर्मियों ने धड़ल्ले से जॉब कार्ड बनाकर वितरण कर दिया। इस दौरान कई सरकारी व नामी-गिरामी कंपनियों में नौकरी करने वाले का भी जॉब कार्ड बना दिया गया। वहीं एक कर्मी ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि जिले के सभी बीपीएल परिवारों को लोगों का जॉब कार्ड बनाने का निर्देश वरीय पदाधिकारियों द्वारा दिया गया था। धड़ल्ले से जॉब कार्ड बनाकर वितरण किया गया है।

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