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वाल्मीकि बराज से छोड़ा 1 लाख क्यूसेक 'तबाही' का पानी:5 फीट बढ़ा गंडक का जलस्तर, किनारे तक पानी बढ़ने से 50 लाख से अधिक के तरबूज की खेती बर्बाद

छपरा2 महीने पहले
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गंडक में पानी बढ़ने से लाखों की तरबूज की खेती बर्बाद। - Dainik Bhaskar
गंडक में पानी बढ़ने से लाखों की तरबूज की खेती बर्बाद।

चक्रवाती तूफान यास तो शांत होने लगा है, लेकिन इसके कारण हो रही लगातार बारिश ने तबाही मचा दी है। छपरा में गंडक नदी के जलस्तर में 5 फीट की बढ़ोतरी हो गई है। पहले गंडक नदी अपने किनारे को छोड़कर धारा के बीच तक सिमटी हुई थी। यास तूफान ने नदी का व्यास बढ़ा दिया। अब नदी अपने दोनों किनारे तक फैल गई है। इससे 50 लाख से अधिक के तरबूज की खेती बर्बाद हो गई है। जानकारी के अनुसार बाल्मीकि बराज से एक लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। बराज से छोड़ा गया पानी रविवार को प्रखंड क्षेत्र की नदियों में आ जाएगा। इससे गंडक में पानी और अधिक बढ़ेगा।

पहले लॉकडाउन ने मारा, अब यास ने
गंडक नदी के बालू पर सैकड़ों किसानों ने 1 करोड़ से अधिक की लागत से खीरा, ककड़ी, तरबूज आदि की खेती की थी। फल निकलना शुरू ही हुआ था कि तब तक लॉकडाउन लग गया, जिसके बाद दूर-दूर से आने वाले बड़े खरीदारों का आना बंद हो गया। कई दिनों के इंतजार के बाद खरीदार नहीं आए तो तरबूज किसानों की बेचैनी बढ़ने लगी। खेतों में फल पककर खराब होने लगे। फिर किसान औने-पौने भाव में खुद फल की गाड़ी खरीदारों तक भिजवाने लगे। किसी तरह किसानों ने अपनी लागत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा निकाला था।

खीरा, ककड़ी, तरबूज सब बर्बाद कर गया यास तूफान।
खीरा, ककड़ी, तरबूज सब बर्बाद कर गया यास तूफान।

किसानों ने सरकार से लगाई मदद की गुहार
अब यास तूफान ने किसानों की आस को चूर-चूर कर दिया। तरबूज किसान रामपुररुद्र निवासी अनिल कुमार सहनी ने बताया कि मैंने साहूकारों से ब्याज पर पैसा लेकर खेती की थी। नदी में पानी बढ़ने से सारी फसल डूब गई। अब तो यह चिंता हो रही है कि कर्ज कैसे दिया जाएगा। सरकार को हमारी मदद करनी चाहिए।

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