आयोजन:जेपी व लोहिया के विचार हमेशा प्रासंगिक बने रहेंगे

छपरा20 दिन पहले
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  • रामजयपाल कॉलेज की कार्यशाला में एमएलसी ने कहा- उनके संघर्ष व विचारों को युवा जीवन में उतारें

लोकनायक जयप्रकाश नारायण और डॉ. राममनोहर लोहिया के विचारों से जनमानस को अवगत कराने के लिए बुधवार से तीन दिवसीय जेपी-लोहिया शिक्षण कार्यशाला रामजयपाल कॉलेज परिसर स्थित लक्ष्मी नारायण यादव अध्ययन केंद्र में शुरू हुआ। कार्यशाला का उद्घाटन जेपी विवि के कुलपति प्रो. फारूक अली ने किया। कुलपति ने कहा कि जेपी और लोहिया के विचार भारतीय सामाजिक-राजनीतिक व्यवस्था में सर्वकालिक रूप से प्रासंगिक बने रहेंगे। जेपी जीवन भर समता, बन्धुता, स्वतंत्रता एवं मानवीय मूल्यों की प्रस्थापना के लिए राजसत्ता से दूर रहकर संघर्ष करते रहे और देश में सामाजिक, सांस्कृतिक व रचनात्मक परिवर्तन के अगुआ के रूप में कार्य करते रहे। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में गांधी जी के साथ सहयोग करके आजादी की लड़ाई को एक नई दिशा दी।

छात्र नारा लगाते थे- ‘भारत के तीन प्रकाश, गांधी, लोहिया-जयप्रकाश

कुलपति प्रो. अली ने कहा कि लोहिया ने अपने अंतिम सांस तक भारत के गरीबों, शोषितों,मजलूमों तथा समाज के विशाल पिछड़े वर्ग को राजनीति के मुख्य धारा में लाने का प्रयास करते रहे। उन्होंने कहा कि वे अपने छात्र जीवन में यह नारा लगाते थे कि’ भारत के तीन प्रकाश, गांधी, लोहिया-जयप्रकाश। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए बिहार विधान परिषद के सदस्य प्रो. वीरेंद्र नारायण यादव ने कहा कि लोहिया के जीवन की संघर्ष गाथा आज के युवाओं के लिए प्रेरणादायी तब बन सकती है जब वे उन्होंने महादेवी वर्मा को उद्धृत करते हुए कहा कि लोहिया देश के एक मात्र ऐसे हिन्दी साहित्य के विद्वान है,जिन्होंने संवाद शैली में देश के जनमानस को मातृभाषा हिन्दी में उद्वेलित किया।

संगोष्ठी 8 अक्टूबर को 11:30 बजे से होगी
संगोष्ठी के तृतीय सत्र की शुरुआत 8 अक्टूबर को 11:30 बजे से होगी। पत्रकार उर्मिलेश व दिल्ली विवि के प्राध्यापक डॉ. नवल किशोर का व्याख्यान होगा।

जीवन के प्रमुख घटनाओं को संक्षिप्त ब्यौरा प्रस्तुत किया
जेपी स्मारक ट्रस्ट, सिताबदियारा के प्रो. ब्रजेश कुमार सिंह ने जेपी के जीवन से लेकर देहावसान तक उनके जीवन के प्रमुख घटनाओं को संक्षिप्त ब्यौरा प्रस्तुत किया। शिक्षण कार्यशाला में उपर्युक्त लोगों के अलावा डॉ. अमित रंजन, ईश्वर राम, संजय चौधरी, प्रो. अरुण कुमार, विद्यासागर विद्यार्थी, रंजीत कुमार, डॉ. ललन प्रसाद यादव, सुषमा रानी, पूनम कुमारी, सुधा रानी, प्रो. अत्रिनन्दन अत्रेय, छात्र नेता शैलेंद्र यादव, रूपेश, देवेन्द्र, डॉ. राजीव, डॉ. प्रियरंजन, डॉ. संजीव आदि भी उपस्थित रहे। आगत अतिथियों का स्वागत एवं कार्यशाला का संचालन डॉ. दिनेश पाल ने किया।

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