मुआयना:माइनिंग अफसर ने पानापुर गंडक नदी के विभिन्न घाटों का मुआयना किया

छपराएक महीने पहले
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गंगा नदी के लाल बालू को सोना कहा जाता है। उसी तरह गंडक नदी का उजला बालू भविष्य में चांदी हो सकता है। सोमवार को जिले के अधिकारियों की फौज पानापुर गंडक नदी के विभिन्न घाटों का मुआयना की। जानकारी के अनुसार अधिकारियों ने गंडक नदी के उजले बालू के खनन की संभावनाओं की तलाश की। अधिकारियों ने सरौंजा भगवानपुर, पृथ्वीपुर, रामपुररुद्र 161 में उजले बालू का खनन करने के लिए उपयुक्त जगह को ढूंढने का प्रयास किया। अब पानापुर प्रखंड क्षेत्र में भी उजले बालू के खनन की शुरुआत हो सकती है।

आसानी से मिलने वाला उजला बालू स्थानीय लोगों के लिए टेढ़ी खीर हो सकता है। कुछ कीमत में मिल जाने वाला उजला बालू भविष्य में महंगा हो सकता है। हालांकि इसका दूसरा पहलू यह भी है कि सरकारी खजाने में बढ़ोतरी होगी। सरकार का राजस्व बढ़ेगा तो विकास की रफ्तार भी बढ़ेगी। साथ ही स्थानीय लोगों के रोजगार में भी बढ़ोतरी हो सकती है। गौरतलब है कि गरीब-गुरबे लोग घर बनवाने के दौरान उजले बालू का भी उपयोग करते हैं। गंडक नदी के तटीय इलाके के लोग जरूरत पड़ने पर गंडक नदी से बालू निकाल कर उपयोग करते थे। भविष्य में जिसे सरकारी टेंडर मिलेगा, वही व्यक्ति नदी से उजला बालू निकाल सकता है

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