मां दुर्गा का आह्नान:...या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता और शंखनाद से मां दुर्गा का आह्नान

छपरा10 दिन पहले
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आमी मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु। - Dainik Bhaskar
आमी मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु।
  • वैदिक मंत्रों से मां दुर्गा की गयी पूजा-अर्चना और किया गया कलश स्थापन
  • सुबह से ही घरों व शहर के पूजा पंडालों में रही चहल-पहल, मंदिरों में उमड़ी मां के भक्तों की भीड़
  • विभिन्न नदी तटों से सुबह में गाजे-बाजे के साथ हुई जलभरी

गुरुवार को शहर से लेकर गांव तक वैदिक मंत्रों से गूंज उठा। मंदिरों में घड़ी घंट बज रहे थे। लाउडस्पीकरों से ...या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता, नम: तस्यै-नम: तस्यै-नम: तस्यै नमो नम: मंत्र पूरे शहर में गुंजायमान हो रही थी। देवी भक्तों ने शारदीय नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की। जिले के आमी स्थित अंबिका भवानी मंदिर समेत सभी प्रसिद्ध मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी थी। पूजा अर्चना के दौरान डंके व बैंड बाजे भी बज रहे थे। कुल मिलाकर पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया था। पूजा आयोजकों ने कलश स्थापन के लिए सुबह चार बजे से ही तैयारी शुरू कर दी थी। छह बजते-बजते मंदिरों व पूजा पंडालों से जयकारे की जयघोष गूंजने लगी थी।

पूजा आयोजकों ने कलश स्थापन के लिए सुबह चार बजे से ही तैयारी शुरू कर दी थी

इस बार 8 दिन का नवरात्र
शक्ति की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्र 7 अक्टूबर को शुरू होगा। आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तिथि तक देवी के नौ रूपों की उपासना की जाएगी। लेकिन इस बार चतुर्थी तिथि का क्षय होने से नवरात्र 8 दिन के होंगे। तृतीया 9 अक्टूबर को सुबह 7:49 बजे तक रहेगी, जबकि चतुर्थी 10 अक्टूबर को सुबह 4:55 बजे तक रहेगी।

15 अक्टूबर को दशहरा
मान्यता है कि कलश स्थापना से मां अन्नपूर्णा प्रसन्न होती हैं और घर को खुशियों, धन-धान्य व सुख-समृद्धि से भर देती हैं। शास्त्रों के अनुसार कलश सुख-समृद्धि, वैभव और मंगल कामनाओं का प्रतीक होता है। महाष्टमी 13 अक्टूबर और महानवमी 14 अक्टूबर को है, जबकि 15 अक्टूबर को दशहरा मनाया जाएगा।

साल में 4 बार नवरात्र, 2 में महाविद्याओं की साधना
देवी पुराण में दी गई जानकारी के अनुसार नौ शक्तियों के मिलन को नवरात्र कहा जाता है, जो हर साल चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ के महीने में आती है। वसंत ऋतु में इसे चैत्र या वासंती नवरात्र कहा जाता है, जबकि शरद ऋतु व आश्विन मास में आने वाली नवरात्र शारदीय कही जाती है। शेष दो यानि गुप्त नवरात्र माघ और आषाढ़ में आते हैं। नवरात्र के दौरान मां दुर्गा की 10 महाविद्याओं की साधना की जाती है।

जलभरी का दृश्य था काफी मनोरम
कलश स्थापना के पहले जलभरी का कार्यक्रम हुआ। शहर के आस-पास के नदी तटों की ओर लोगों का हुजूम कलश के साथ सुबह पांच बजे से ही गुजरने लगा था। जो घरों में कलश स्थापन के लिए जलभरी करने जा रहे थे वे अपने गांव-मोहल्लों के लोगों के साथ थे। वहीं पूजा आयोजकों ने पूरी तैयारी के साथ जलभरी का कार्यक्रम किया।

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