मिलिट्री स्कूल बेंगलुरू से प्राप्त की शिक्षा:लाॅकडाउन में विदेश से लौट बच्चों का कर रहे मार्गदर्शन

डोभी8 महीने पहले
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  • डोभी के गम्हरिया के हैं सॉफ्टवेयर इंजीनियर विनय, गांव के गरीब बच्चों की करते है आर्थिक मदद

ज्ञान अद्भुत धन है, यह आपको एक ऐसी अद्भुत खुशी देती है, जो कभी समाप्त नहीं होती। जब कोई आपसे ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा लेकर आता है और आप उसकी मदद करते हैं तो आपका ज्ञान कई गुना और बढ़ जाता है। इस कथन को सत्य कर रहा है डोभी का एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर विनय कुमार। प्रखंड क्षेत्र के गम्हरिया गांव के निवासी विनय कुमार पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, जो लॉकडाउन के पहले हांगकांग में एक अमेरिकन सॉफ्टवेयर कंपनी में जॉब कर रहे थे। पिछले वर्ष से लॉकडाउन के कारण अभी घर पर ही रह रहे हैं और वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं।

कुमार प्रतिदिन अपनी ड्यूटी के बाद शाम में बच्चों को पढ़ाते रहते हैं और नई नई चीज देश दुनिया के बारे में बताते रहते हैं। उन्होंने बच्चों को एकत्रित कर कंप्यूटर के क्षेत्र में भी बच्चों को दिलचस्पी दिलाने के लिए बेसिक कंप्यूटर का नॉलेज भी देते हैं। गणित उनका शुरू से फेवरेट विषय रहा है और अपने स्कूलिंग करियर में हमेशा गणित विषय में इन्होंने शत प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। वे गणित में भी बच्चों को नए नए तरीके से सोचने की क्षमता को विकसित करवाने का प्रयास करते हैं। पिछले एक साल से ये प्रतिदिन बच्चों से रूबरू होकर उन्हें मार्गदर्शित कर रहे हैं और नई नई चीजों से रूबरू भी करवा रहे हैं।

मिलिट्री स्कूल बेंगलुरू से प्राप्त की शिक्षा

उनका जन्म एक किसान परिवार में हुआ था। लेकिन ये अपनी बुद्धि और कौशल के बदौलत पांचवी कक्षा में ही मिलिट्री स्कूल की परीक्षा पास कर मिलिट्री स्कूल बंगलौर से कक्षा 12वीं तक की पढ़ाई की और उसके बाद इंजीनियरिंग एंट्रेंस परीक्षा पास करने के बाद बीआईटी रांची से अपनी ग्रेजुएशन (सॉफ्टवेयर इंजीियरिंग)की पढ़ाई पूरी की। और आज दुनिया की 10 वीं सबसे बड़ी कंपनी अमेरिकन हेल्थ केयर में अपनी मेहनत और लगन के बदौलत एचआर के पद पर काबिज हो चुके हैं।

गांव के गरीब बच्चों की करते है आर्थिक मदद

वैसे बच्चे जो आर्थिक रूप से कमजोर और पढ़ने में मेधावी हैं उनको मार्गदर्शन कर ऑनलाइन कोर्स खरीद पढ़ाई करवाने में आर्थिक मदद भी कर रहे हैं। अगर बच्चों के पास थोड़ी बहुत कम पैसे भी हो, खुद की क्रेडिट कार्ड से ऑनलाइन कोर्स खरीदवा देते हैं और बच्चे घर बैठे पढ़ाई करते रहते हैं।विनय कुमार डोभी प्रखंड क्षेत्र के बच्चों के लिए एक बड़ी प्रेरणा के रूप में उभर कर सामने आए हैं। और यह साबित कर चुके है कि छोटे गांव के बच्चे भी बड़े-बड़े मल्टीनेशनल कंपनियों में जा सकते हैं और अपना एवं क्षेत्र का नाम रोशन कर सकते हैं।

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