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धार्मिक महत्व:एकादशी से भगवान विष्णु विश्राम की अवस्था में आ जाते हैं : विश्वनाथ

दरौंदा17 दिन पहले
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  • पूजा-पाठ और अनुष्ठान के लिए आषाढ़ का महीना सबसे उत्तम

आषाढ़ मास को पूजा पाठ के लिए उत्तम माना गया है। उक्त बातें बगौरा गांव निवासी आचार्य विश्वनाथ पाठक ने कही। उन्होंने कहा कि आषाढ़ मास की एकादशी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। आषाढ़ मास की अंतिम एकादशी को देवशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता हैं। आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है 20 जुलाई को है।

पंचांग के अनुसार 25 जून से आषाढ़ मास का आरंभ हो गया है। आषाढ़ मास का समापन 24 जुलाई को होगा।आषाढ़ मास में ही चातुर्मास शुरू होंगे।पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास में चंद्रमा पूर्वाषाढ़ा और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में गोचर करता है। इसलिए इस मास को आषाढ़ कहा जाता है।आषाढ़ मास की एकादशी तिथियों का विशेष महत्व बताया गया है।आषाढ़ मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को योगिनी एकादशी और शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है।

पंचांग के अनुसार 20 जुलाई को आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से चातुर्मास शुरू होगा।इस एकादशी से भगवान विष्णु विश्राम की अवस्था में आ जाते हैं।14 नवंबर को देवोत्थान एकादशी पर विष्णु भगवान शयन काल आरंभ होता है। मान्यता है कि चातुर्मास में शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। देवशयनी एकादशी व्रत का शुभ मुहूर्त देवशयनी एकादशी तिथि प्रारम्भ - जुलाई 19 को 09:59 पीएम बजे देवशयनी एकादशी समाप्त - जुलाई 20 को 07:17 पी एम बजे देवशयनी एकादशी व्रत पारण- जुलाई को 05:36 ए एम से 08:21 एएम।

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