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आत्मनिर्भर कैसे हो भारत:दो वर्षों में डुमरांव में 500 केसीसी आवेदन, मिला किसी को नहीं

डुमरांव19 दिन पहले
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  • प्रशासनिक अधिकारी कह रहे बैंकों की मनमानी, किसानों को परेशान किया जा रहा

किसानों के आत्मनिर्भर बनने में बैंक रोड़ा बन रहे हैं। मामला किसानों को दिया जाने वाला केसीसी लोन से जुड़ा है। सिस्टम की कई पेचीदगियां झेलते हुए किसान किसी तरह केसीसी आवेदन लेकर बैंकों में पहुंचते हैं। लेकिन, फॉर्म में गड़बड़ी बताकर उन्हें वापस कर दिया जा रहा है। दो वर्षों में डुमरांव प्रखंड के 16 पंचायतों के करीब 500 किसानों ने विभिन्न बैंकों में केसीसी लोन के लिए आवेदन किया।

सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का लाभ किसान लेना चाहते हैं। लेकिन, उनके आवेदन विभिन्न कारण बताते हुए अस्वीकृत कर दिए जा रहे हैं। ऐसे में देश कैसे आत्मनिर्भर होगा। क्योंकि बिना लोन लिए खेती करना मुश्किल है। किसान सम्मान निधि योजना, कृषि यंत्रों पर अनुदान, बीज अनुदान, केसीसी लोन सहित अन्य प्रकार की योजनाएं चला रही है। लेकिन प्रखंड के सभी सोलह पंचायतों के किसानों को पिछले दो सालों में एक भी किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) लोन की स्वीकृति नहीं दी गयी है।
किसान क्रेडिट कार्ड से छोटे किसान 1.5 लाख बिना गारंटी के ले सकते है लोन: किसान क्रेडिट कार्ड छोटे किसानों की मदद करने के लिए सरकार की एक सबसे अहम और लोकप्रिय योजना है। भारत सरकार किसान क्रेडिट कार्ड रखने वाले छोटे किसानों को बिना गारंटी के 1.5 लाख रुपये तक केसीसी लोन देती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, किसान तीन सालों में पांच लाख रुपये तक का केसीसी लोन ले सकते हैं। केसीसी लोन पर ब्याज दर भी बहुत कम है। यह केवल चार फीसद सालाना है। किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा लेने के लिए किसान को पीएम किसान सम्मान निधि योजना में अकाउंट खुलवाना जरूरी होता है।

कृषि कार्यालय से बैंकों में भेजे गए हैं आवेदन: कृषि कार्यालय से लगभग पाँच सौ किसानों का आवेदन बैंक आफ इंडिया, स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, इलाहाबाद बैंक, मध्य ग्रामीण बैंक ,बैंक आफ बड़ौदा, सहित पंचायतों से संबधित विभिन्न बैंकों को भेजा है। किसी भी आवेदक किसानों को लोन नहीं मिला है। गौरतलब है कि डुमरांव क्षेत्र शहर के अलावा आसपास के गांवों में खेती के लिए जमीनें काफी उपयुक्त हैं। लॉकडाउन में कई लोगों का काम धंधा बंद हो जाने के बाद उन्होंने आवेदन किया कि लोन लेकर वे खेती कार्य कर सकेंगे। लेकिन, पिछले दो वर्षों में पड़े 500 आवेदनों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
कृषि सलाहकारों को दी गयी थी जिम्मेदारी

पंचायतों में नियुक्त कृषि सलाहकार कृषि समन्वयक बताते है कि केसीसी के तहत अधिक से अधिक किसानों कृषि लोन की स्वीकृति दिलाने का निर्देश विभाग को मिला था। किसानों से आवेदन लेकर जांचोपरांत संबधित पंचायतों के बैंकों को भेजा गया। लेकिन अभी तक पिछले दो वर्षों में एक भी किसानों को लोन नहीं मिला है। बताया जाता है कि जितना एकड़ जमीन है उस जमीन के हिसाब लोन दिये जाने का प्रावधान है। इसके लिए किसानों को जमीन का रसीद,या एलपीसी देना होगा। उसी मुताबिक लोन की राशि तय की गयी है।
बैंक प्रबंधन की लापरवाही के कारण नही हो पा रहे है लोन: बीएओ
बीएओ कृष्ण मोहन चौधरी ने बताया कि विभाग ने लगभग पांच सौ केसीसी लोन के लिए आवेदन विभिन्न बैंकों के पास भेजा गया है। किसान के जमीन के हिसाब से दस लाख तक लोन दिए जा सकते है। लेकिन बैंक प्रबंधक के मनमानी रवैया के कारण एक भी किसानों का लोन स्वीकृत नहीं हुआ है।
कहते है एल डीएम
एल डीएम आनंद ओझा ने कहा कि बीएओ का आरोप गलत है। वहां से इनकंपलीट आवेदन आने पर बैंक लोन कैसे देगा। किसान अपने दस्‍तावेज लेकर आए और उसके अनुसार लोन प्राप्त कर सकते है। केसीसी करना तो सरकार की प्राथमिकता है।

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