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लापरवाही:1334 योजनाओं में 575 का काम पूरा हुआ, 759 में काम अभी अधूरा, खर्च हो गए 2 करोड़, 44 लाख रूपए

डुमरांव10 दिन पहले
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मनरेगा योजना में कार्यरत मजदूर। - Dainik Bhaskar
मनरेगा योजना में कार्यरत मजदूर।
  • न गांव की तस्वीर बदली, न पंचायत की तकदीर, डुमरांव में मनरेगा योजना बनी कामधेनु

महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) से न तो गांव की तस्वीर बदली न ही ग्राम पंचायत की तकदीर बदल सकी। हालात जहां थे वही पर ठहरे हैं। सरकार के उद्देश्य भी सफल नहीं दिख रहे हैं। चाहे इसे व्यवस्था की कमी कहे अथवा रहनुमाओं के ईमानदार पहल का अभाव। पर एक बात जरूर सच है कि जिनके कंधे पर इसकी सफलता की जिम्मेदारी है उनके बीच की सांठगांठ से यह योजना कामधेनु से कम नहीं है। कागजों पर योजनाओं की लंबी फेहरिस्त है।

योजनाओं पर खर्च की गई राशि के आंकड़े से सबकुछ साफ हो जाता है। केवल तीन वित्तीय वर्ष 2019-20,2020-21 एवं 2021-22 के आंकड़े गवाह है कि करीब 36 माह में 8 करोड़ 32 लाख 93 हजार रुपये खर्च हुए हैं। इसमें भी खास यह कि प्रखण्ड के सोलह पंचायत में से तीन पंचायत ज्यादा राशि खर्च की गई है ।

हालांकि वित्तीय वर्ष 2019-20 के आंकड़े के अनुसार सभी सोलह पंचायत में 1334 योजनाएं ली गयी। जिसमे करीब 575 योजना विभाग द्वारा पूर्ण है जबकि 759 योजना अपूर्ण है जिसमे 2 करोड़, 44 लाख रुपये खर्च किया गया है । वैसे ही वित्तीय वर्ष 2020-21 के अनुसार कुल पंचायत में 968 योजना में 945 योजना पूर्ण और 23 अपूर्ण जिसमे 3 करोड़ 85 लाख 48 हजार राशि खर्च किया गया है । वहीं वित्तीय वर्ष 2021-22 के 771 योजनाओं में 343 पूर्ण जबकि 428 अपूर्ण जिसमे 2 करोड़ 3 लाख 42 हजार रुपये खर्च हुआ है।

कितनी योजनाएं किस वित्तीय वर्ष में है अपूर्ण
सोवा में 61, अरियाव 10 अटांव 45, भोजपुर जदीद 21,भोजपुर कदीम 55, छतनवार 19, चिल्हरी 49, कनझरुआ में 39, कसिया 42, कोरानसराय 93 ,कुशलपुर 71, लाखंडीहरा 29, मठिला 36, मुंगाव 38, नन्दनं 22, नुआंव 41 ये सभी योजना वित्तीय वर्ष 2021-22 में अपूर्ण है। जबकि 2020-21 में करीब 23 अपूर्ण एवं 2019-20 में 759 अपूर्ण थे।

इन पंचायतो में संचालित हैं योजनाएं
डुमरांव प्रखण्ड के करीब लगभग चौदह पंचायतो में वृक्षारोपण का कार्य संचालित है। जिसमंे मठिला -कोरानसराय रोड में रोड के किनारे वृक्षारोपन का कार्य कुछ दिनों पहले से शुरू कर दिया गया है। गौर हो कि जीविकोपार्जन के लिए रोजगार की तलाश में अन्य प्रदेशों में पलायन नहीं करें। इस योजना में पुरुषों के अलावे महिलाओं, नि:शक्तों के रोजगार का भी प्रावधान किया गया है।
कहते हैं कार्यक्रम पादाधिकारी, मनरेगा
डुमरांव प्रखण्ड के पीओ, मनरेगा सुनील कुमार ने बताया कि योजना का लाभ गरीब मजदूरों को मिले इसका पूरा ख्याल रखा जाता है। पारदर्शिता को लेकर प्रति माह समीक्षा की जाती है। साथ ही साथ वरीय उप समाहर्ता स्तर के पदाधिकारियों के द्वारा प्रति माह जांच की जाती है। गड़बड़ी की शिकायत पर जांच दल गठित कर कार्रवाई की जाती है। कई स्तरों पर इसकी मॉनिटरिंग की व्यवस्था है।

एक नजर आंकड़े पर : वित्तीय वर्ष 2021-22 में किस पंचायत में कहां हुई कितनी राशि खर्च

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