विजय उत्सव दिवस:डुमरांव में हेमचन्द्र विक्रमादित्य का मना विजय उत्सव दिवस

डुमरांव10 दिन पहले
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गुरुवार को डुमरांव में महाराज हेमचन्द्र विक्रमादित्य हेमू का विजय उत्सव दिवस एक निजी सभागार में मनाया गया। कार्यक्रम की शुरूआत महाराज हेमू के तैल चित्र पर पुष्प् चढ़ाकर किया गया। जिसकी अध्यक्षता शत्रुध्न प्रसाद उर्फ मोहन गुप्ता ने की। मोहन गुप्ता ने 7 अक्टूबर 1556 का दिन। हिंदुस्तान के इतिहास का स्वर्णिम दिन। इसी दिन अपने रण कौशल व सफल सैन्य व्यूह रचना के बल पर भारत मां का सपूत हेमू सम्राट बना था।

असाधारण प्रतिभा के बल पर साधारण परिवार के हेमू का हेमचन्द्र विक्रमादित्य बनना भारतीय इतिहास की दुर्लभ घटना है। हेमू ने आगरा व तुगलकाबाद को फतह करते हुए दिल्ली के पुराना किला पहुंचकर सम्राट का ओहदा और निष्पक्ष न्याय की प्रतीक विक्रमाजीत अथवा विक्रमादित्य की उपाधि धारण की थी। उन्होंने कहा कि वीर हेमू को पूर्व राज्याभिषेक से पहले हेमचंद्र को जो अन्य लड़ाइयां लड़नी पड़ी, उनका भी जिक्र हम कर रहे है।

गुप्ता ने बताया कि अफगान सामंतों को दबाने के बाद हेमू ने मुगलों को दबाने की पहल की। तब तक हुमायूं सिकंदर सूर आदि को हराकर फिर दिल्ली पर जम गया था। सिकंदर सूर का आतंक शेष था, इसलिए हुमायूं पुत्र अकबर तथा उसका संरक्षक बैरम खां राजधानी से दूर अफगानों के विरुद्ध भारी सेना के साथ डेरा डाले पड़े थे। इस बीच पुस्तकालय में पैर फिसलने से हुमायूं की मृत्यु हो गई।

हेमू के डर के कारण 16 दिन तक यह समाचार मुगलों ने छिपाए रखा। हेमू ने इसे शुभ अवसर मानकर दिल्ली फतह की योजना को मूर्तरूप देना शुरू कर दिया। अलवर से हाजी खां और संभल से सादी खां ने दिल्ली युद्ध में हेमू के सहायक के रूप में भाग लिया। इटावा, कालपी तथा आगरा होकर हेमू दिल्ली की ओर बढ़ा चुका था। पहले आगरा अधिकार में लिया फिर 50 हजार घुड़सवार, एक सहस्त्र हाथी, 51 बड़ी व 500 छोटी तोपें लेकर दिल्ली पर हमला कर दिया।

हेमू के पास उस जमाने के हिसाब से दूसरों से उन्नत हथियार थे। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि देशभक्ति के जज्बे के अलावा हेमू को अपने हथियार निर्माण के अनुभव व कुशल व्यूह रचना की कला ने भी सम्राट की गद्दी तक पहुंचाया।

इस मौके पर तुलसी प्रसाद,रामबाबू प्रसाद,कृष्णा प्रसाद गुप्ता,सुरेश प्रसाद गुप्ता,मनोज गुप्ता,अजय गुप्ता ,गोपाल जी, अध्यक्ष रविंदर प्रसाद गुप्ता,मोती गुप्ता मनोज गुप्ता राजू गुप्ता,उमेश गुप्ता खिरौली, गोपाल गुप्ता सुनील गुप्ता सनÛउंद गुप्ता हीरालाल गुप्ता संजय गुप्ता ,रौशन गुप्ता संतोष गुप्ता इंद्रमणि गुप्ता सही सैकड़ों रौनियार बंधु थे।

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