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घर बैठे करें माता के दर्शन:दक्षिणेश्वरी भवानी के दर्शन से पूरी होती है मनोकामना

डुमरांव11 दिन पहले
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  • महाराज की भक्ति पर प्रसन्न हो नीम के पेड़ के रूप में प्रकट हुई थी भवानी

नवरात्र में शक्ति की देवी की आराधना हर कोई करता है। आमसारी गांव के पास स्थित दक्षिणेश्वरी भवानी की सच्चे मन से प्रार्थना करने वाले भक्तों की मनोकामना जरूर पूरी होती है। मंदिर के स्थापना की कहानी मंदिर व मां काली के साथ उनके अनन्य भक्त अमसारी के अनंत पाठक उर्फ अनंत महाराज की भक्ति भी जुड़ी हुई है।

कहा जाता है कि करीब पांच से छह सौ साल पहले अनंत महाराज की भक्ति से प्रसन्न होकर मां भवानी ने इस जगह पर नीम के पेड़ के रूप में अवतार लिया था तब से आज तक इनकी पूजा की जाती है तथा भवानी भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती है। नवरात्र में यहां हर दिन हजारों लोग मत्था टेकने आते है तथा श्रद्धा से सर झुकाते है। कालांतर में नीम का पेड़ आंधी में टूट गया।

तब ग्रामीणों के सहयोग से उस नीम के पेड़ के शेष बचे तने को सिमेंट का कवर चढ़ा सुरक्षित कर दिया गया तथा वहा भव्य मंदिर बना मां काली की मूर्ति की स्थापना की गई। आज उस मंदिर में मां काली के साथ सिद्धेश्वरी भवानी तथा सूर्यदेव की मूर्तियां स्थापित है। मंदिर के ठीक समाने एक तालाब भी है जो मंदिर की छंटा को कई गुना बढ़ा देता है। नवरात्र सहित पूरे साल वहा श्रद्धालुओं का तांता लगता है।

अमसारी के शिवजी पाठक, अरैला के घनश्याम पाठक आदि ने बताया कि राज परिवार में पूजा पाठ करने के दौरान एक बार अनंत महाराज ने भूलवश एकम तिथि को दूज बता दिया गया। तब पंडितों ने पत्रा के आधार पर उनकी बात काट दी।

हालांकि उन्होंने साबित किया कि वह सही थे। इसी से प्रसन्न होकर महाराजा द्वारा अनंत जी को 52 बीघा जमीन दान दी गयी। शिक्षक व शोध छात्र दुर्गेश कुमार सिंह ने भी इस बात की पुष्टि की है तथा बताया कि राज परिवार द्वारा दान किये गये जमीन के ठीक बीच मां दक्षिणेश्वरी का मंदिर है।

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