निर्देश:गंगा नदी में होगा मूर्ति विसर्जन, कांव व भैंसहा नदी का किया गया निरीक्षण

डुमरांवएक महीने पहले
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  • 156 पूजा समितियों से मिल रहा सहयोग तालाब व बरसाती नदियों में विसर्जन को राजी
  • निर्देश की अवहेलना करने वाली समिति पर 50 हजार जुर्माना लगेगा

एनजीटी के निर्देश गंगा और उसकी सहायक नदियों में या उनके किनारे अब मूर्ति विसर्जन नहीं होगा। अगर इस निर्देश का अवहेलना हुई तो सीधे 50 हजार रूपए जुर्माना उस समिति पर लगेगा। यह हनयम को वर्ष 2019 में पहली बार लागू किया गया था। परन्तु 2020 में कोरोना के कारण पंडाल व मुर्ति नही रखी गई थी।

फिर से उसी नियम को पालन कराया जा रहा है। जिसके बाद स्थानीय प्रशासन में हडकंप मच गया है। क्योंकि शांति समिति के बैठक में इस मुद्दे को नही उठाया गया था। स्थानीय पूजा समिति गंगा नही में विसर्जन करती थी। वहीं डुमरांव एसडीएम कुमार पंकज व एसडीपीओ श्री राज ने विसर्जन के लिए अनुमंडल में नए घाटों को तलाशने का प्रकिया मंगलवार को पुरे दिन चला।

जिसके अनुमंडल के 156 समितियों का विसर्जन के लिए डुमरांव शहर व आस-पास के इलाकों के लिए बरसाती नदी भैंसहा का चयन किया गया। वहीं केसठ, नावानगर, सोनवर्षा, बासुदेवा थाना क्षेत्र के मुर्तियों का विसर्जन कांव नदी में होगा। दोनों जगहों का एसडीएम व एसडीपीओ सहित सभी पदाधिकारियों ने निरीक्षण किए। कई दिशा निर्देश भी दिए।

लाइट-नाव संग पर्याप्त संख्या में हो पुलिस बल की व्यवस्था: एसडीएम
एसडीएम कुमार पंकज ने अनुमंडल के सभी सीओ को नदी में नाव, गोताखोर व जाल की व्यवस्था के अलावा विसर्जन घाटों पर लाइट लगवाने का भी निर्देश दिए।

पूजा समितियों से मिल रहा सहयोग
मंगलवार की रात बुधवार को पुरे दिन अनुमंडल के विभिन्न गांव में स्थापति दुर्गा पूजा समितियों व प्रशासन के बीच सम्पर्क का दौर चलता है। वहीं प्रखंड में सीओ सुनील कुमार वर्मा व बीडीओ संतोष कुमार को जिम्मेदारी दी गई थी। डुमरांव एसडीएम कुमार पंकज ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि अनुमंडल के सभी पुजा पंडाल समितियां चिह्नित जगहों पर विसर्जन के लिए तैयार हो गई है। उनका पूरा सहयोग मिल रहा है।

इन घाटों पर होगी विसर्जन : डुमरांव थाना का भैंसहा नदी, सिमरी का नया भोजपुर ताल कोलिया नदी व बांध के पास आए बाढ़ के पानी में होगा। नैनिजोर ब्रह्मपुर निमेज व उधरा भागड़ घाट पर विसर्जन किया जाएगा।

जो समिति नहीं मानेंगे नियम, तो उनपर हरहाल में 50 हजार जुर्माना वसूलेंगे : एसडीएम
डुमरांव एसडीएम कुमार पंकज ने बताया कि क्लीन गंगा मिशन (एनएमसीजी) के महानिदेशक ने ये दिशा-निर्देश 16 सितंबर 2019 को जारी किए थे। इनमें कहा गया है कि गंगा नदी में किसी भी तरह के मूर्ति विसर्जन की अनुमति नहीं दी जाएगी। दशहरा, दीपावली, छठ पूजा और सरस्वती पूजा आदि त्योहारों अब मुर्ति विसर्जन नही होगा। मूर्ति विसर्जन करने पर पर्यावरणीय मुआवजे के रूप में 50 हजार रुपये का जुर्माना राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड वसूलकर अपने पास जमा करेगा।

सीधा असर मानव जीवन पर पड़ता है: एसडीपीओ
डुमरांव एसडीपीओ श्री राज ने कहा कि विश्वकर्मा पूजा, दुर्गा पूजा, दीपावली (लक्ष्मी और काली पूजा), छठ पूजा, सरस्वती पूजा आदि के मौकों पर अभी तक लोग गंगा और उसकी सहायक नदियों में ही मूर्ति विसर्जन करते रहे हैं। पूजा की बाकी सामग्री भी नदी में ही प्रवाहित कर दी जाती है।

इसके कारण न सिर्फ गंदगी बल्कि नदियों में प्रदूषण बढ़ा है। इसे लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) गंभीर है। मूर्ति निर्माण में सिंथेटिक पेंट, डाई और अघुलनशील पदार्थों खासकर प्लास्टर ऑफ पेरिस सहित अन्य चीजों से मरकरी, क्रोमियम, लैड, कैडमियम, जिंक ऑक्साइड आदि पानी में पहुंचते हैं। इसका सीधा प्रभाव मानव और जलीय जीवन पर पड़ रहा है। मगर अब मूर्ति विसर्जन नदी या उसके किनारे पर नहीं होगा।

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