पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

जानकारी:कृषि काॅलेज में लगे धान की संकर प्रजातियों से रूबरू हुए कई अन्नदाता

डुमरांवएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • कृषि वैज्ञानिक ने बताए उनके गुण, छह से सात साल में तैयार होती है एक संकर नस्ल
  • बोले कृषि वैज्ञानिक- किसानों के लिए फायदेमंद होगी संकर नस्लें

शुक्रवार को स्थानीय वीर कुंवर सिंह कृषि काॅलेज में धान के विशेषज्ञ कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रकाश सिंह ने क्षेत्रीय किसानों को धान की प्रमुख संकर नस्लों से अवगत कराया। डॉ. प्रकाश ने इस दौरान खुद से तैयार किए गए धान की सात संकर नस्लों के बारे में किसानों को विस्तार से जानकारी दी तथा उनके रोपाई से मिलने वाले लाभ को भी बताया।

डा प्रकाश ने मुख्य रूप से धान की नई संकर किस्में बीआरआर 2177, बीआरआर 2176, बीआरआर 2180, बीआरआर 2181 के अलावे धनिया नस्ल, काला धान व काला नमक धान के प्रजातियों को दिखाया। इसके अलावे कृषि वैज्ञानिक ने उन प्रजातियों को भी दिखाया जो अभी डेवलप हो रही है।

इसके साथ ही कृषि वैज्ञानिक ने फल लगने के बाद धान में लगने वाले प्रमुख बीमारी स्मार्टल ग्रिन (लेंढ़ा) के बारे में जानकारी दी तथा बताया कि इसका कीड़ा टुगरू मुख्य रूप से कवक प्रजाति का होता है तथा इसके कारण धान की उर्वरता व उसकी क्वालिटी प्रभावित होती है। कृषि वैज्ञानिक ने कहा कि वे ऐसी प्रजाति पर काम कर रहे है जिसमें यह बीमारी नहीं लगे।

डा प्रकाश ने बताया कि बीआरआर 2171 सेंटेड धान है तथा यह सोनाचूर की तरह होता है। वही बीआरआर 2176 आगात धान की किस्म है जो मात्र 115 दिन में तैयार हो जाती है। वही बीआरआर 2180 चूड़ा के लिए काफी उपयुक्त है। जबकि बीआरआर 2181 व बीआरआर 2110 प्रजातियां भी उच्च कोटि है।

सस्ती और अच्छी नस्ल की है संकर नस्लें
धान के संकर नस्लों को विकसित करने वाले कृषि वैज्ञानिक ( धान विशेषज्ञ ) डा प्रकाश सिंह ने कहा कि एक संकर नस्ल को तैयार करने में छह से सात साल का समय लगता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए पहले दो तीन नस्लों को आपस में क्रास कराया जाता है फिर नया सीड्स तैयार किया जाता है। पूरी प्रक्रिया में छह से सात साल लगता है। उन्होंने कहा कि संकर नस्लें किसानों के लिए फायदेमंद व उच्च क्वालिटी की होती है।

कमजोरों के लिए वरदान
कृषि वैज्ञानिक ने कहा कि बीआरआर 2177 सभी मंसूरी की क्रॉस वेरायटी है और यह सुगंधित होने के साथ ही सभा मंसूरी से 15 प्रतिशत अधिक उपज देने वाली है। जबकि धनिया नस्ल की धान 140 दिन में पकती है और यह भी सुगंधित होती है।

उन्होंने कहा कि काला धान नागालैंड के धान की किस्म है जिसमें सुगर की मात्रा कम रहती है। यह सुगर मरीजों के लिए फायदेमंद है जबकि काला नमक धान आयरन से भरपुर है और कमजोर लोगों के लिए यह किस्म वरदान साबित होगी।

आज का राशिफल

मेष
Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
मेष|Aries

पॉजिटिव- आज भविष्य को लेकर कुछ योजनाएं क्रियान्वित होंगी। ईश्वर के आशीर्वाद से आप उपलब्धियां भी हासिल कर लेंगे। अभी का किया हुआ परिश्रम आगे चलकर लाभ देगा। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे लोगों के ल...

और पढ़ें