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जताई नाराजगी:पुराना भोजपुर में 12 वर्षों से 20 बीघा कृषि योग्य भूमि जलजमाव से हो रही बर्बाद, लोगों में आक्रोश

डुमरांवएक महीने पहले
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  • सैकड़ों बार स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से लगाई समाधान करने की गुहार
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पिछले बारह साल से जलजमाव से घिरे पुराना भोजपुर में लोग नरकीय जीवन जी रहे है। वहीं इन ग्रामीणों को सुनने वाला कोई है। पिछले पांच सालों में ग्रामीणों के द्वारा इस भयंकर समस्या के निदान के लिए मुख्यमंत्री,सांसद से लेकर सभी अधिकारियों को पत्र लिख चुके है। परन्तु कोई कार्रवाई नही हुई। वर्ष 2018 में सड़क पर जलजामव हो गया था। जिसके बाद लोग आक्रोशित हुए तो स्थानीय प्रसाशन के द्वारा अस्थायी निदान करते हुए पानी की निकासी की गई।  

जलजमाव के कारण पिछले 12 वर्षो से यहा की करीब 1500 की आबादी का जीवन नारकीय हो गया था तथा लोगों में संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बना हुआ था। जिससे हर समय लोग डरे सहमें रहते थे। इस कारण महिलाओं व बच्चियों का घरों से निकलना मुश्किल था तो रात ढलने से पहले ही लोग अपने घरों मे दुबकने को मजबूर थे।  वहीं सबसे बुरा हाल है किसानों का जिनकी लगभग 20 एकड़ जमीन सालों भर पानी में डूबा रहता है। जिससे कोई उपज नही हो सकी है।
छोटे सरकारी गड्ढे में रहता था पानी 
पुराना भोजपुर के दक्षिण टोला की तरफ मुख्य पथ से पांच गलियां जाती है। वार्ड नम्बर 11, 12, 13, 14 व 15 के कुछ भाग जिसके नालियों का पानी एक ही जगह पर जमा हो जाता है। जो पहले गांव एक छोटा सा सरकारी गढ्ढा था। अब आबादी बढ़ी है तो पानी खर्च भी बढ़ा है जिससे उस गढ्ढे से पानी ओवरफ्लो कर गया। जिससे आस पास के 20 एकड़ खेतों में भंयकर जल जमाव हो गया। वहीं लोगों द्वारा सड़क किनारे अतिक्रमण कर मिट्टी डाल टीला बना दिया गया था। बारिश होने कारण नालियों का पानी सड़क पर फैल गया है। 
कृषकों को होती है आर्थिक हानि
अतिक्रमण के चलते दक्षिण टोला के इस पथ पर करीब घुटने भर पानी बरसात के दिनों जमा हो गया था। वहीं बीस एकड़ की उपजाउ जमीन में फैल गया है। जिसके कारण पिछले कई वर्षो से यह उपजाउ जमीन पानी में डूबी है। बताया जाता है कि जलजमाव के कारण खेती नहीं होने से किसानों को हर साल लाखों का नुकसान होता है।

छावनी में तब्दील हो गया था पुराना भोजपुर
26 दिसम्बर 2018 को पुराना भोजपुर गांव पुलिस छावनी में तब्दील हो गया था। यहा की सबसे बड़ी व प्रशासन के लिए गंभीर बन चुकी जलजमाव की समस्या से स्थायी निजात दिलाने के लिए प्रशासन की टीम पुरी मुश्तैदी से पहुंची थी। डुमरांव एसडीओ हरेन्द्र राम तथा डीएसपी केके सिंह के साथ तत्कालीन सीओ सुमंतनाथ के साथ डुमरांव, नया भोजपुर, कोरानसराय, नावानगर, मुरार, कृष्णाब्रह्म, सिमरी समेत दस थानों की पुलिस टीम मौके पर मौजूद थी। अस्थायी समस्या का निदान कराया गया था। परन्तु अबतक कोई स्थायी निदान नही हो सका है।
सरकार नहीं दिखा रही इच्छा शक्ति नही तो जाता निदान : पूर्व प्रमुख
डुमरांव प्रखंड के पूर्व प्रमुख सह स्थानीय निवासी सुरेश सिंह ने कहा कि पहले खाली जमीन था। परन्तु पिछले कुछ सालों में अबादी तो लोगों ने मकान बना लिया। जिससे जमीन अतिक्रमण हो गई। अब खेतों में पानी जाने लगा और किसान की 20 बीघा जमीन बर्बाद हो रहा है। अगर सरकार व अधिकारी चाहे तो इसका निदान हो सकता है कि सड़क के किनारे नाली बनाया है। हलांकि कुछ अतिक्रमण है। परन्तु अधिकारी उसे हटाने सक्षम है। अगर यह पहल होगी तो किसानों को अपनी जमीन मिल जाएगी और लोगों को रोग से मुक्ति।
दलित बस्ती को जाने वाली सड़क पर जलजमाव गंभीर समस्या है। पहले जल निकासी गई गई थी। परन्तु कुछ लोग नाली को दुसरी तरफ से मोड़कर पानी गिराना चाहते है जिसके कारण सात निश्चय योजना से संभव नही है। इसलिए स्थायी निदान नही हो पा रहा है। -हरेन्द्र राम, डुमरांव एसडीओ

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