परेशानी / जान हथेली पर रख ड्यूटी दे रहे आउट पोस्ट पर तैनात पुलिसकर्मी, 20 वर्ष से न भवन न सड़क

Policemen posted at out post paying duty on life palm, neither building nor road for 20 years
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Policemen posted at out post paying duty on life palm, neither building nor road for 20 years

  • सिमरी थाना क्षेत्र के गंगा तटवर्तीय इलाके में रामदास राय के डेरा ओपी के जवानों का जीवन कठिन
  • विभाग में प्रचलित है- किसी को सजा देनी है तो रामदास राय ओपी भेज दो

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:00 AM IST

डुमरांव. सिमरी थाना क्षेत्र के गंगा तटवर्तीय इलाके में रामदास राय के डेरा ओपी के जवानों का जीवन नारकीय है। पुलिस विभाग में कहा जाता है कि अगर किसी पुलिस वाले को सजा देनी हो तो उसे रामदास राय व भरियार ओपी भेज दो। क्योंकि यहां सुविधा व सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नही है। किसानों व ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए गंगा के तट से बना से नजदीक के गांव के समीप लगभग दो दशक पूर्व ग्रामीणों की सुरक्षा की दृष्टि से सहायक थाना का निर्माण कर स्थापित किया गया था। लेकिन लोगों की सुरक्षा करने वाला ओपी इन दिनों खुद भी असुरक्षा का दंश झेल रहा है।

ओपी के स्थापना के इतने दिनों बीत जाने के बाद भी एक अदद सा पक्की सड़क उपलब्ध नही हो सका। कच्ची सड़क बनी भी थी वो पिछले वर्ष बाढ़ के पानी से क्षतिग्रस्त हो गयी थी। जिसके कारण ओपी जाने वाला मुख्य मार्ग पर गढ्ढा बन गया है। उसमें बरसात का पानी जमा हो रहा है। है। जिसके कारण पिछले कई दिनों से पुलिस वाहनो की आवागमन ठप पड़ गयी है। जिसके कारण पुलिस को पगडंडियों के सहारे पैदल चलकर गश्ती करना पड़ता है। ग्रामीणों को ओपी पर अपनी शिकायत लेकर जाने में  काफी फजीहत का सामना करना पड़ता है। महिलाओं को तो वहां जाना नामुमकिन सा हो जाता है।
चार माह बाढ़ में देनी होती ड्यूटी
जानकारों की मानें तो ओपी भवन की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि बरसात के दिनों में गंगा नदी में बाढ़ आने के कारण ओपी परिसर बाढ़ के पानी से चारों तरफ से घिर जाता है। यह ओपी बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमा पर अवस्थित है। आपको बताते चलु की ब्यासी गंगा पुल के रास्ते आये दिन शराब एवं गौ तस्करों द्वारा ओपी क्षेत्र में तस्करी कर लाया जाता है। ऐसे में सवाल ये है कि संसाधन विहीन पुलिस लोगों की सुरक्षा और तस्करों पर लगाम कैसे लगा पायेगी।
जमीन के अभाव में किराये पर है ओपी 
भरियार ओपी का परिसर असुरक्षित है। भरियार पहुंच यदी आप पुलिस के आउट पोस्ट की तलाश करे तो पुरे दिन भटकने के बाद भी आप को ओपी नजर नही आएगा। असल में चक्की प्रखंड क्षेत्र का ओपी भरियार में चलता है। जमीन के अभाव में इसे भरियार बजार में किराए के जमीन मे झोपड़ी डाल चलाया जाता है। झोपडी तथा जर्जर भवन में चल रहे इस ओपी में कार्यरत पुलिसकर्मी खुद को असुरक्षित महसुस करतेे है। ऐसे में इन पुलिस कर्मियों के सहारे क्षेत्र की सुरक्षा की बात बेमानी लगती है। वर्ष 1982 में अस्तित्व में आया यह ओपी तब से जमीन के अभाव में भरियार बजार में ही चलता है।

वर्षो से इसका झोपड़ीनुमा भवन जर्जर हो चुका है। झोपड़ी में रहने को विवश पुलिस कर्मियों को हर समय जानवरों का भय सताते रहता है। यहां न तो मालखाना है न ही हाजत है लिहाजा पकड़ कर लाए गए अपराधियों को सुरक्षित रखने में पुलिस कर्मियों काफी मशक्कत करना पड़ता है। यही नही पुलिस कर्मियों न तो स्वच्छ जल मिलता है और न ही दो मिनट का सुकुन मिलता है।

जमीन चिन्हित हो गई  है कागजी कार्रवाई हो रही पुरी: एसपी
बक्सर एसपी उपेन्द्र नाथ वर्मा ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि नैनिजोर थाना, भरियार ओपी के लिए अभी जमीन चिन्हित करने लिया गया है। आगे की कार्रवाई जारी है। जबकि बासुदेवा ओपी, तिलक राय हाता ओपी का प्रपोजल विभाग को भेज दिया गया है। वहीं अद्यौगिक थाना के लिए जमीन अभी तक नही मिला है। जहां जमीन का काम पुरा हो गया वहां के लिए प्रपोजल भेज दिया गया है।

कहते है ओपी प्रभारी
ओपी प्रभारी विष्णुदेव कुमार ने बताया कि बरसात के मौसम में परेशानी तो जरूर होती है।लेकिन किसी भी परिस्थिति लोगों की सेवा के लिये हमलोग हर समय तत्पर रहते हैं।

तीन दशक बाद झोपड़ी में चलता है तीन ओपी थाना
अनुमंडल के तीन थाना झोपड़ी में चलता है। जिसमें नैनिजोर थाना, भरियार ओपी व तिलक राय हाता ओपी है। इन्हें अपने आर्म्स के सुरक्षा के लिए काफी चिंतित रहना पड़ता है। क्योंकि थाने में तो बाउंड्री है और ना ही झोपड़ीनुमा थाने में गेट। खुद के समान के सुरक्षा के साथ आर्म्स की सुरक्षा भी बड़ी जिम्मेदारी बन जाती है। ज्ञात हो कि तीनों ओपी थाना लगभग तीन दशक पूर्व बनाया गया था। परन्तु अबतक सुविधाओं से लैश नही किया गया।

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