संदेश दिया:शिक्षा से ही समाज में फैली सामाजिक कुरीतियों व भेदभाव को मिटाया जा सकता है : डॉ. रमेश

डुमरांव2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • आंचलिक नाटक ‘घर के करकरहट’ का कलाकारों ने किया शानदार मंचन

चौगाईं प्रखंड अंतर्गत पांडेयपुर गांव में दुर्गा पूजा के मौके पर आंचलिक नाटक “घर के करकरहट” का शानदार मंचन किया गया । जिसका उद्घाटन प्रसिद्ध शिक्षाविद डा. रमेश सिंह तथा समाजसेवी राजीव रंजन सिंह ने संयुक्त रूप से फिता काटकर किया । इस अवसर पर अतिथि के तौर पर भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अमरेन्द्र पांडेय तथा सामाजिक कार्यकर्ता साधु सिंह शामिल थे ।

आंचलिक नाटककार मुन्ना पांडेय द्वारा लिखित नाटक घर के करकरहट को ग्रामीण युवाओं ने अपने बेहतरीन अभिनय से पूरी तरह जीवंत कर दिया । सामाजिक कुरुतियों पर चोट करती तथा घर-घर की स्थिति को दर्शाती इस नाटक का उपस्थित सैकड़ों महिलाओं और पुरुषों ने देर रात तक आनंद लिया ।

वहीं इस नाटक के द्वारा यह दर्शाया गया कि कैसे एक सौतेले भाई ने मेहनत मजदूरी कर अपने छोटे भाई को एमए कराया तथा कर्ज लेकर उसे नौकरी दिलवाई । फिर वो भाई नौकरी तथा शादी के बाद अपने भाई तथा पिता के साथ कैसा दुर्व्यवहार किया । जो हमारे समाज तथा आस-पास में प्रतिदिन घटित हो रहा है ।

इससे पहले कार्यक्रम के उद्घाटन के बाद लोगों को संबोधित करते हुए प्रसिद्ध शिक्षाविद तथा संत जॉन सीनियर सेकेंड्री स्कूल डुमरांव के निदेशक डा रमेश सिंह ने कहा कि शिक्षा ही वो माध्यम है जिसके बल पर समाज में फैली सामाजिक कुरुतियों एवं भेदभाव को मिटाया जा सकता है ।

यदि समाज में परिवर्तन लाना है तथा सही मायने में सबका विकास करना है तो उसके लिए शिक्षा सबसे जरूरी कारक है। वहीं अपने संबोधन में समाजसेवी राजीव रंजन सिंह ने कहा कि अपनी संस्कृति एवं परंपराओं को संजो कर रखना हम युवाओं का सबसे बड़ा कर्तव्य है।

जिसके सहारे हम अपने आप को अपनी जड़ों से जोड़ कर रखते हैं। इसके साथ ही उन्होंने युवाओं को नाट्य परंपरा को बचाए रखने तथा उसमें बढ़-चढ़ कर भाग लेने के लिए धन्यवाद दिया।

खबरें और भी हैं...