लापरवाही / पारा चढ़ते ही शुरू हुई ताड़ी की बिक्री सड़क किनारे सरेआम सज रहे बाजार

The sale of toddy started as soon as the mercury climbed, the market was being decorated publicly on the roadside
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The sale of toddy started as soon as the mercury climbed, the market was being decorated publicly on the roadside

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

डुमरांव. सरकार द्वारा शराब बंदी के साथ ताड़ी बंदी भी की परन्तु इसका असर महज एक साल रहा है। परन्तु अब जिले के विभिन्न इलाकों में खुले में प्रशासने के नाक के नीच ताड़ी बिक्री शुरू हो गई है। लोग मजे से इसका आनंद ले रहे है। वहीं मई माह के शुरू होते ही गर्मी ने जो तेवर दिखाया कि कोल्ड़ ड्रींक की मांग बढ़ने लगी है। लोग अपने-अपने हिसाब से गर्मी से राहत के लिये पेय पदार्थ का इस्तेमाल करने लगे है। लेकिन जैसे ही गर्मी ने आंख तड़ेर कर देखना शुरू क्या इन सारे अत्याधुनिक ठंढ़ई गांव के पुश्तैनी ठंढ़ई ताड़ी के के आगे सब कि रौनक फिकी पड़ गयी है।

सुबह पांच बजे से लेकर देर रात तक खेतों में,बगीचों में, सड़कों के किनारे कही खुले आसमान के निचे तो कही झोपड़ी में आम हो या खास गाड़ी से हो या साईकिल से जिसको भी पुश्तैनी ठंढ़ई ताड़ी का मजा लेना है वो जमीन पर बैठ कर ताड़ी का आनंद ले रहे है। वही तरकुल के ऊचे पेड़ से जान जोखिम में डाल कर ताड़ी निकालने वाले पाशी बिरादरी के लोगों कि चांदी कट रही है 25 -60 रुपए प्रति ग्लास बेच रहे है। पाशी बिरादरी में बिरादरी में 75 फिसदी परिवारों का सिर्फ इस गर्मी के मौसम का इंतजार रहता है।

ताड़ी बेचने से मिले पैसों से सालों भर अपने परिवार का भरण-पोषण करते है। ताड़ी विक्रेता शंकर पाशी कहते है कि ढ़ाई माह कमाना और दस माह खाना इस मौसम जाने के बाद कभी-कभार पेड़ो से मधु निकालने का काम मिल जाता है। जमीन तो है नही कि खेती किया जाय। जैसे-जैसे गर्मी आंख तड़ेरती जा रहा है ताड़ी कि पैदवार बढ़ती जा रही है। लोगों के बीच ताड़ी कि मांग तेज होती जा रही है। दुसरी तरफ सरकार द्वारा शराब बंदी व ताड़ी बंदी के बाद डीएम रमन कुमार के समय में चोरी छीपे ताड़ी बिका था। परन्तु इस बार कोई अब तक समस्या नही आई है। शराब बंदी के बाद इस वर्ष तो बजार काफी गर्म है।

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